भरसार विश्वविद्यालय की छात्रा मधु यादव की मौत से छात्रों में आक्रोश।
स्वास्थ्य सुविधाओं पर उठे सवाल।
पौड़ी। वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार की बीएससी चतुर्थ वर्ष की छात्रा मधु यादव (23) की उपचार के दौरान मौत के बाद विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों का आक्रोश फूट पड़ा। छात्रों ने विश्वविद्यालय में पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने और समय पर उपचार न मिलने का आरोप लगाते हुए सोमवार को प्रदर्शन किया तथा कक्षाओं का बहिष्कार किया। छात्रों ने विश्वविद्यालय में नियमित चिकित्सक की नियुक्ति के साथ आपातकालीन चिकित्सा एवं त्वरित रेफरल व्यवस्था मजबूत करने की मांग उठाई।

मधु यादव की मौत पर छात्रों का प्रदर्शन
जानकारी के अनुसार, मधु यादव पिछले तीन-चार दिनों से मौसमी बुखार से पीड़ित थीं। रविवार शाम अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें विश्वविद्यालय की डिस्पेंसरी ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उन्हें श्रीनगर रेफर किया गया। छात्रों के अनुसार, डिस्पेंसरी के फार्मासिस्ट और वाहन चालक उन्हें करीब 30 किलोमीटर दूर श्रीनगर लेकर पहुंचे। वहां उपचार के लिए कुछ समय इंतजार करना पड़ा। इसके बाद चिकित्सकों ने छात्रा को उच्च स्वास्थ्य केंद्र के लिए रेफर कर दिया। मधु को एम्स ऋषिकेश ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
छात्रों का आरोप है कि एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल रेफर किए जाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण समय बीत गया। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय की डिस्पेंसरी में फार्मासिस्ट की व्यवस्था तो है, लेकिन नियमित चिकित्सक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में गंभीर स्थिति उत्पन्न होने पर विद्यार्थियों को तत्काल चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाती। छात्रों ने विश्वविद्यालय में स्थायी चिकित्सक की नियुक्ति, पर्याप्त चिकित्सा उपकरण और आपात स्थिति के लिए प्रभावी रेफरल व्यवस्था की मांग की।
मधु की मौत की सूचना के बाद सोमवार को छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में रैली निकालकर प्रदर्शन किया और कक्षाओं का बहिष्कार किया। छात्रों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस व्यवस्था बनाने की मांग की।
जिलाधिकारी पौड़ी स्वाति एस. भदौरिया ने बताया कि मामले की जानकारी मिलने के बाद सोमवार सुबह मेडिकल टीम को विश्वविद्यालय भेजा गया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य की जांच की जा रही है।
विश्वविद्यालय के डीन छात्र अधीक्षता डॉ. एके जोशी ने बताया कि पिछले माह विश्वविद्यालय में चिकित्सक के पद के लिए विज्ञापन जारी किया गया था, लेकिन अभी तक चिकित्सक उपलब्ध नहीं हो पाया है। चिकित्सक की नियुक्ति के लिए विश्वविद्यालय स्तर से प्रयास जारी हैं।
छात्रों के अनुसार, 30 मई को भी एक छात्र कोट ब्लॉक कार्यालय के निकट सड़क हादसे का शिकार हुआ था। उसे अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई थी। वहीं, आईसीयूआर से मान्यता प्राप्त संस्थान में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी सामने आया है। मधु यादव की मौत के बाद भरसार विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की स्वास्थ्य सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है।


