रुद्रप्रयाग में यूकेडी की बढ़ती सक्रियता।
2027 में त्रिकोणीय मुकाबले की बन सकती है जमीन।
रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर रुद्रप्रयाग विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक समीकरण धीरे-धीरे आकार लेने लगे हैं। क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) इस बार पिछले चुनावों की अपेक्षा बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद के साथ संगठन को मजबूत करने में जुटा है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के भरत सिंह चौधरी 29,660 मत प्राप्त कर विजयी हुए थे, जबकि कांग्रेस के प्रदीप प्रसाद थपलियाल को 19,858 और यूकेडी प्रत्याशी मोहित डिमरी को 4,623 मत मिले थे। यूकेडी को मिले करीब 7.3 प्रतिशत मत यह संकेत देते हैं कि क्षेत्र में पार्टी का एक सीमित लेकिन मौजूद जनाधार है। यदि 2027 में पार्टी इस आधार को विस्तार देने में सफल होती है तो वह चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने वाली महत्वपूर्ण ताकत बन सकती है।
उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास की बात करें तो आंदोलन की शुरुआती आवाजों में जखोली विकासखंड मुख्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राज्य आंदोलन के दौर में यूकेडी जनता की अपेक्षाओं और क्षेत्रीय अस्मिता से जुड़े मुद्दों को लेकर अग्रिम पंक्ति में रहा, लेकिन राज्य गठन के बाद पार्टी अपने राजनीतिक आधार को कायम नहीं रख सकी। लगातार हाशिये पर जाने के पीछे नेतृत्व का अभाव, कमजोर संगठनात्मक ढांचा और प्रभावी राजनीतिक रणनीति का अभाव प्रमुख कारणों में माना जाता है। हालांकि पिछले कुछ समय से युवा नेतृत्व द्वारा संगठन को सक्रिय करने की कोशिशों से यूकेडी के प्रति विशेषकर युवाओं में फिर से रुचि दिखाई देने लगी है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार यूकेडी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी विरासत और राजनीतिक विचारधारा को आम मतदाता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की है। मूल निवास, सख्त भू-कानून, पलायन, रोजगार, स्थानीय युवाओं के अवसर तथा पहाड़ के संसाधनों पर स्थानीय अधिकार जैसे मुद्दों को यदि पार्टी स्थानीय समस्याओं से जोड़कर प्रभावी ढंग से उठाती है तो उसका जनाधार बढ़ सकता है। वहीं, रुद्रप्रयाग सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच मतदाताओं में संभावित असमंजस की स्थिति का लाभ भी यूकेडी उठा सकती है। मजबूत स्थानीय प्रत्याशी, बूथ स्तर का संगठन और स्पष्ट चुनावी रणनीति के साथ मैदान में उतरने पर मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि फिलहाल यूकेडी को जीत का दावेदार मानना जल्दबाजी होगी, लेकिन 2027 में पार्टी के पिछले प्रदर्शन में सुधार और चुनावी समीकरणों पर प्रभाव डालने की संभावना जरूर नजर आती है।


