सूखे और वनाग्नि से जूझ रहे पहाड़ को मिली राहत, 'अमृत' बनकर बरसी बारिश।
फसलों और नर्सरी को मिला नया जीवन, पशुपालकों की बढ़ी उम्मीदें।
जखोली- प्रदेश में जनवरी माह से जारी लंबे सूखे के बाद रविवार को हुई हल्की बारिश ने किसानों, बागवानों और पशुपालकों के मुरझाए चेहरों पर रौनक लौटा दी है। यह वर्षा न केवल रबी की फसलों के लिए 'संजीवनी' बनकर आई है, बल्कि महीनों से धधक रहे जंगलों की आग और चारों ओर छाए धुंध भरे वातावरण से भी निजात मिली है।
जनवरी से बारिश न होने के कारण खेतों में गेहूं, जौ और सरसों की फसलें दम तोड़ रही थीं। लेकिन इस हल्की फुहार ने मिट्टी में नमी पैदा कर फसलों को नई ऊर्जा दी है। विशेष रूप से बागवानी के क्षेत्र में काम कर रहे काश्तकारों ने बड़ी राहत की सांस ली है।
नर्सरी संचालक ओमप्रकाश कोठारी और हाथीराम कोठारी ने बताया कि उन्होंने लगभग 2 लाख सेब के पौधे और 1 लाख अखरोट, पुलम, खुबानी, नारंगी व कागजी नींबू की नर्सरी तैयार की है। उन्होंने कहा:
"इतने बड़े क्षेत्र के लिए सिंचाई का पानी उपलब्ध कराना असंभव हो रहा था और पौधे सूखने की कगार पर थे। आज की बारिश ने पौधों को बचा लिया है, अब इनमें नमी बनी रहेगी।"
जंगलों में जनवरी से लगी आग ने चारागाहों को राख में बदल दिया था, जिससे पशुपालकों के सामने चारे का गंभीर संकट खड़ा हो गया था। स्थानीय पशुपालक शकुन्तला देवी, मंजू देवी और दुर्गा देवी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जंगलों की आग बुझने से अब वहां नई घास उगेगी। इससे पशुओं के चुगान के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध हो सकेगा।
लगातार वनाग्नि के कारण पहाड़ों में दृश्यता (Visibility) कम हो गई थी और लोगों को सांस लेने में कठिनाई हो रही थी। बारिश के बाद आसमान साफ हो गया है और वातावरण में घुला धुआं साफ होने से लोगों ने राहत महसूस की है।


