उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027: भाजपा की बढ़त के बीच सत्ता के कितने करीब कांग्रेस

उत्तराखंड चुनाव 2027, Uttarakhand Election 2027, कांग्रेस, भाजपा, उत्तराखंड विधानसभा चुनाव, राजनीतिक विश्लेषण, कांग्रेस उत्तराखंड, भाजपा उत्तराखंड,
खबर शेयर करें:

 

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027: भाजपा की बढ़त के बीच सत्ता के कितने करीब कांग्रेस।

इन सीटों पर बदल सकता है खेल।

 उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। फिलहाल चुनावी तस्वीर में भाजपा कांग्रेस से आगे दिखाई दे रही है, लेकिन कांग्रेस को सत्ता की दौड़ से बाहर मानना जल्दबाजी होगी। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में 19 सीटों पर सिमटी कांग्रेस के सामने इस बार अपने परंपरागत जनाधार को मजबूत करने के साथ ही भाजपा के कब्जे वाली सीटों में सेंध लगाने की बड़ी चुनौती है।

2022 के चुनाव में भाजपा ने 47 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस को 19 सीटें मिली थीं। मत प्रतिशत की बात करें तो भाजपा को करीब 44.3 प्रतिशत और कांग्रेस को 37.9 प्रतिशत वोट मिले थे। दोनों दलों के बीच वोट प्रतिशत का अंतर लगभग 6.4 प्रतिशत रहा, लेकिन सीटों के परिणाम में यह अंतर काफी बड़ा रहा। यही आंकड़ा कांग्रेस के लिए 2027 में उम्मीद की वजह भी है। प्रदेश की कई सीटों पर मुकाबला बेहद करीबी रहा था। ऐसे में यदि कांग्रेस करीबी सीटों पर अपने प्रदर्शन में मामूली सुधार करती है तो विधानसभा की तस्वीर बदल सकती है।

कांग्रेस ने इस बार चुनावी तैयारियां भी पहले शुरू कर दी हैं। पार्टी ने वरिष्ठ नेताओं प्रीतम सिंह, हरक सिंह रावत, यशपाल आर्य और गणेश गोदियाल को चुनावी जिम्मेदारियां देकर संगठन को सक्रिय करने का प्रयास किया है। पार्टी के लिए टिकट वितरण में जीत की संभावना रखने वाले चेहरों को प्राथमिकता देना अहम होगा। हालांकि बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करना, कार्यकर्ताओं की गुटबाजी पर नियंत्रण और स्थानीय मुद्दों को चुनावी अभियान का केंद्र बनाना कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती है।

वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उत्तराखंड की पांचों सीटों पर जीत दर्ज की थी। भाजपा का वोट शेयर करीब 56.8 प्रतिशत रहा, जबकि कांग्रेस लगभग 32.8 प्रतिशत पर रही। यह अंतर कांग्रेस के सामने मौजूद चुनौती को स्पष्ट करता है।

राजनीतिक तौर पर कांग्रेस के लिए नेतृत्व का स्पष्ट चेहरा भी महत्वपूर्ण हो सकता है। पार्टी यदि मजबूत प्रत्याशी चयन, संगठनात्मक एकजुटता और स्थानीय मुद्दों पर प्रभावी अभियान के साथ मैदान में उतरती है तो 2027 का मुकाबला 2022 से काफी अलग हो सकता है। फिलहाल कांग्रेस को सत्ता के करीब कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन भाजपा के लिए भी अगला चुनाव आसान मानना राजनीतिक जोखिम हो सकता है।

खबर पर प्रतिक्रिया दें 👇
खबर शेयर करें:

हमारे व्हाट्सएप्प ग्रुप से जुड़ें-

WhatsApp पर हमें खबरें भेजने व हमारी सभी खबरों को पढ़ने के लिए यहां लिंक पर क्लिक करें -

यहां क्लिक करें----->