घास लेने गई महिला उफनते गदेरे में बही, मौत से गांव में पसरा मातम।
घसियारी योजना और वादों के दावों के बीच उफनते गदेरे में बही महिला, आखिर कब थमेगा पहाड़ की नारियों का दर्द?
रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड में पर्वतीय महिलाओं के कठिन जीवन और कार्यबोझ को कम करने के दावे सरकारी फाइलों और योजनाओं तक ही सिमटकर रह गए हैं। 'मुख्यमंत्री घसियारी कल्याण योजना' और चारा/घास प्रजातियों के रोपण व बीज वितरण के तमाम सरकारी दावे धरातल पर उतरने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं। इसी का नतीजा है कि चारा पत्ती जुटाने के चक्कर में कभी पहाड़ियों से फिसलकर मौत तो कभी उफनते नदी-नालों में बहकर जान गंवाना उत्तराखंड की महिलाओं की नियति बन चुका है। ताजा मामला रुद्रप्रयाग जनपद के ग्राम स्वारा का है, जहां घास लेने गई एक महिला उफनते गदेरे के तेज बहाव में बह गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार (02 अगस्त 2026) प्रातः 11:32 बजे ग्राम प्रधान सेमकोटी द्वारा जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र, रुद्रप्रयाग को सूचना दी गई कि ग्राम स्वारा के नामी तोक (तिमली से आगे) में घास लेने गई एक महिला का अचानक पैर फिसल गया और वह गहरे उफनते गदेरे में बह गई। सूचना मिलते ही SDRF, जल पुलिस और DDRF बसुकेदार की टीमों ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर सघन खोज अभियान चलाया। अपराह्न 12:30 बजे महिला का शव गदेरे से बरामद कर पंचनामा व पोस्टमार्टम की कार्यवाही हेतु पुलिस को सौंपा गया। मृतका की पहचान विनीता देवी (38 वर्ष), पत्नी हिम्मत सिंह नेगी, निवासी ग्राम कोटी के रूप में हुई है।
इस दुखद हादसे से परिजनों में कोहराम मचा है और पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण जनपद के बरसाती नाले और गदेरे उफान पर हैं। प्रशासन ने ग्रामीणों से नदी-नालों के समीप न जाने की अपील की है, लेकिन सवाल यह उठता है कि जब गांव के पास चारे और घास की ठोस व्यवस्था नहीं होगी, तो जान जोखिम में डालकर जंगल जाना महिलाओं की मजबूरी बना रहेगा।



