शोध कार्य के लिए किसानों ने भूमि देने पर जताई सहमति, किसान मेले का आयोजन पर हुआ मंथन।
जखोली। वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली उत्तराखण्ड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार के कुलपति डॉ. भगवती प्रसाद भट्ट ने पर्वतीय कृषि महाविद्यालय परिसर के साथ त्योंखर गांव के खेंजवा तोक और लुठियाग गांव का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय काश्तकारों और ग्रामीणों से संवाद कर कृषि शोध एवं महाविद्यालय के विकास को लेकर चर्चा की।
कुलपति डॉ. वीपी भट्ट ने बताया कि शोध छात्रों के लिए अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों वाली भूमि की आवश्यकता है। लुठियाग गांव के काश्तकारों ने शोध कार्यों के लिए अपनी भूमि उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है। विश्वविद्यालय स्तर पर इसकी आवश्यक कार्यवाही जल्द शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्थानीय किसानों का सहयोग पर्वतीय कृषि में शोध और नवाचार को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सैन सिंह मेहरा और रूप सिंह मेहरा ने कहा कि क्षेत्र में पर्वतीय कृषि महाविद्यालय की स्थापना आने वाली पीढ़ियों के लिए मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण जनहित से जुड़े कार्यों के लिए अपनी भूमि उपलब्ध कराने को तैयार हैं और भूमि की कमी नहीं होने दी जाएगी।
कुलपति ने बताया कि अक्टूबर माह के अंत में या नवम्बर माह के पहले पखवाड़े में विश्वविद्यालय की ओर से किसान मेले का आयोजन किया जाएगा। मेले में किसान और वैज्ञानिक अपने अनुभव साझा करेंगे। आयोजन की रूपरेखा तैयार करने की जिम्मेदारी ग्रास संस्था के प्रबंध निदेशक रघुवीर सिंह कण्डवाल, लस्तर हिलाईं एफपीसी के निदेशक सतीश भट्ट, जन विकास संस्थान के अध्यक्ष बैशाखी लाल तथा लुठियाग गांव के रूप सिंह मेहरा और सैन सिंह मेहरा को दी गई है।
कुलपति ने महाविद्यालय परिसर में भवन निर्माण कार्य की प्रगति तेज करने के भी निर्देश दिए। इस अवसर पर चिरबिटिया परिसर के डीन अरुणाचलम, डॉ. लक्ष्मी रावत, पूर्व प्रधान रूप सिंह कैंतुरा, सम्पूर्ण सिंह कैंतुरा, प्रीतम सिंह, दीपक कैंतुरा गौरव सिंह, महिला मंगलदल अध्यक्ष उर्मिला देवी, ग्राम प्रधान सुदीपा देवी सहित ग्रामीण मौजूद रहे।







