जखोली में फिर बढ़ा गुलदार का आतंक: बछड़े को बनाया निवाला, ग्रामीणों में दहशत।
कोठियाड़ा गावं में हर दिन शाम ढलते ही गुलदार का आना किसी घटना का कारण बन सकता है।
जखोली (रुद्रप्रयाग): विकासखंड जखोली क्षेत्र में गुलदार (लेपर्ड) के बढ़ते आतंक से एक बार फिर ग्रामीणों में भारी दहशत व्याप्त है। बीते वर्ष तीन महिलाओं को अपना निवाला बना चुके गुलदार ने 20 जुलाई की शाम करीब 8:30 बजे ग्राम इन्द्रनगर निवासी भगवान सिंह राणा की दो वर्षीय भैंस (पड़वा) पर हमला कर उसे मार डाला।
भगवान सिंह के अनुसार, पशु गौशाला के बाहर खूंटे से बंधा हुआ था। भोजन के दौरान चीख-पुकार सुन जब परिजन बाहर आए, तब तक गुलदार बछड़े की गर्दन तोड़ चुका था। अगली सुबह सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और नियमानुसार कार्रवाई शुरू की। वहीं, मखेत की ग्राम प्रधान श्रीमती रेखा देवी, पूर्व प्रधान अषाढ़ सिंह राणा, पंचम सिंह व प्रीतम सिंह ने पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है। वन क्षेत्राधिकारी हरीश थपलियाल ने बताया कि विभागीय कार्रवाई के साथ ही ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
पहाड़ी क्षेत्रों में गुलदार जैसे हिंसक जानवरों का बस्तियों की ओर रुख करना एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। स्थानीय लोगों का मानना है कि पलायन की मार झेल रहे गांवों में जनसंख्या कम होने से गांव-घर वीरान हो रहे हैं, जिससे झाड़ियां और जंगल आबादी के नजदीक पहुंच गए हैं। इसके अलावा, सड़कों के निर्माण के कारण पुराने पारंपरिक पैदल रास्तों पर आवाजाही बिल्कुल कम हो गई है। ये सुनसान रास्ते अब वन्यजीवों के लिए सुरक्षित गलियारे (कोरिडोर) बन चुके हैं, जिनके जरिए वे आसानी से बस्तियों तक पहुंच रहे हैं। प्राकृतिक आवासों में शिकार की कमी और इंसानी बस्तियों के पास लावारिस या बंधे मवेशियों की आसान उपलब्धता ने इस संकट को और अधिक बढ़ा दिया है।


