रुद्रप्रयाग में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर वैज्ञानिक शोध शुरू।
भालू-गुलदार समेत पांच वन्यजीवों पर होगा अध्ययन।
रुद्रप्रयाग। पहाड़ों में लगातार बढ़ रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष के बीच रुद्रप्रयाग वन प्रभाग ने इसके कारणों की वैज्ञानिक पड़ताल शुरू कर दी है। उप वन संरक्षक विनीत कुमार के दिशा-निर्देशन में सलीम अली सेंटर फॉर ऑर्निथोलॉजी एंड नेचुरल हिस्ट्री (SACON) के वैज्ञानिकों और रिसर्च फेलो की छह सदस्यीय टीम ने अध्ययन कार्य प्रारंभ किया है। टीम का नेतृत्व डॉ. शैखोम इनाओतोम्बी कर रहे हैं। शोध में हिमालयी भालू, गुलदार, जंगली सुअर, बंदर और लंगूर से जुड़े मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारणों और परिस्थितियों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा।
शोध की शुरुआत दक्षिणी जखोली रेंज के अंतर्गत भालू की दृष्टि से संवेदनशील उच्छना, पालाकुराली और त्यूंखर सहित अन्य गांवों से की गई है। टीम ग्रामीणों से बातचीत कर वन्यजीवों की गतिविधियों, हमलों के स्थान, समय और परिस्थितियों की जानकारी जुटाने के साथ भोजन की उपलब्धता, प्राकृतिक आवास, मौसम, शिकार की उपलब्धता और मानवीय गतिविधियों जैसे पहलुओं का अध्ययन कर रही है।
रुद्रप्रयाग समेत उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता लगातार सामने आती रही है। 2025 से अबतक रुद्रप्रयाग वन प्रभाग में गुलदार के हमलों से 3 महिलाओं की मौत और कई लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई थी। वहीं जिले में भालू के हमलों की घटनाएं भी चिंता का विषय बनी हुई हैं सितंबर 2025 में भालू के हमले में दो महिलाएं गंभीर रूप से घायल हुई थीं।
स्थानीय ग्रामीणों की मांग है कि केवल वन्यजीवों के हमलों का आंकड़ा जुटाने के बजाय जंगलों की वहन क्षमता, उपलब्ध खाद्य संसाधनों, वन्यजीवों की संख्या और उनके प्राकृतिक आवास का भी व्यापक अध्ययन किया जाए। ग्रामीणों की इन घटनाओं के बाद लंबे समय से मांग है कि वन्यजीवों के स्वभाव और व्यवहार में आए बदलावों को समझे बिना संघर्ष का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
शोध टीम रुद्रप्रयाग वन प्रभाग की सभी रेंजों में अध्ययन कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। उप वन संरक्षक विनीत कुमार ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को प्रभावी ढंग से कम करने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन और उसके आधार पर रणनीति तैयार करना आवश्यक है। इससे वन्यजीव संरक्षण के साथ ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए भी प्रभावी उपाय तय करने में मदद मिलेगी।



