शहीद बहादुर सिंह रावत- 112 साल बाद मिला शौर्य को सम्मान

2/39 Royal Garhwal Rifles World War 1, शहीद बहादुर सिंह रावत अगस्त्यमुनि फलई,
खबर शेयर करें:


112 साल बाद मिला शौर्य को सम्मान: प्रथम विश्व युद्ध के अमर शहीद बहादुर सिंह रावत की गाथा से प्रेरणा लेगी नई पीढ़ी।

ग्राम फलई के वीर सपूत राइफलमैन स्व. बहादुर सिंह रावत की 112 वर्ष पुरानी शौर्यगाथा अब इतिहास के पन्नों से निकलकर जन-जन के बीच जीवंत।


अगस्त्यमुनि (रुद्रप्रयाग): उत्तराखंड की वीरभूमि ने एक बार फिर अपने गौरवशाली सैन्य इतिहास का स्वर्णिम अध्याय दुनिया के सामने रखा है। रुद्रप्रयाग जनपद के अगस्त्यमुनि विकासखंड के अंतर्गत ग्राम फलई के वीर सपूत राइफलमैन स्व. बहादुर सिंह रावत की 112 वर्ष पुरानी शौर्यगाथा अब इतिहास के पन्नों से निकलकर जन-जन के बीच जीवंत हो उठी है। प्रथम विश्व युद्ध में मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले इस जांबाज सैनिक को आखिरकार वह सम्मान और पहचान मिल रही है, जिसके वे वास्तविक हकदार थे।

वर्ष 1880 में जन्मे बहादुर सिंह रावत ने मात्र 21 वर्ष की आयु में '2/39 रॉयल गढ़वाल राइफल्स' में भर्ती होकर देशसेवा का संकल्प लिया था। वर्ष 1914 में फ्रांस के ऐतिहासिक 'प्रथम यप्रेस युद्ध' में उन्होंने अदम्य साहस और अद्वितीय वीरता का परिचय देते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। उनकी शहादत के सम्मान में तत्कालीन सरकार ने परिजनों को 'डेथ मेमोरियल पैनी' प्रदान की थी, जिस पर अंकित शब्द—"HE DIED FOR FREEDOM AND HONOUR"—आज भी उनके अमर बलिदान के जीवंत साक्षी हैं।

सेना के अभिलेखों और ऐतिहासिक दस्तावेजों से उनकी वीरता प्रमाणित होने के बाद, लैंसडाउन छावनी के स्टेशन कमांडर ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी ने शहीद के परिजनों को सम्मानित कर वीर आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की। बहादुर सिंह रावत का नाम लैंसडाउन वॉर मेमोरियल, नई दिल्ली स्थित इंडिया गेट और फ्रांस के 'न्यू चैपल इंडियन मेमोरियल' पर स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है, जो उनके अद्वितीय बलिदान को वैश्विक पहचान देता है।

शहीद के परिजन मोहित, हिमांशु और प्रमोद रावत ने कहा कि अपने पूर्वज के इस सर्वोच्च सम्मान से पूरा परिवार गौरवान्वित है और वे इस अमूल्य धरोहर को सदैव सहेजकर रखेंगे। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता पंकज गोस्वामी ने बताया कि ग्राम फलई में शहीद बहादुर सिंह रावत की स्मृति में शीघ्र ही एक भव्य स्मारक का निर्माण किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और सर्वोच्च बलिदान से प्रेरणा ले सकें। राइफलमैन बहादुर सिंह रावत की यह अमर गाथा भारतीय सेना की शौर्य परंपरा का एक जीवंत प्रतीक है, जो युवाओं को राष्ट्रसेवा का संकल्प लेने के लिए प्रेरित करती रहेगी।


खबर पर प्रतिक्रिया दें 👇
खबर शेयर करें:

हमारे व्हाट्सएप्प ग्रुप से जुड़ें-

WhatsApp पर हमें खबरें भेजने व हमारी सभी खबरों को पढ़ने के लिए यहां लिंक पर क्लिक करें -

यहां क्लिक करें----->