जीतपाल नही जीत पाया एक अदद छत की जंग।
2020 से आशियाने को भटक रहा पीड़ित परिवार, शौचालय तक नसीब नहीं।
रुद्रप्रयाग: सरकारें भले ही 'सबके लिए आवास' और 'स्वच्छ भारत मिशन' के बड़े-बड़े दावे कर लें, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी बेहद कड़वी है। इसका जीता-जागता उदाहरण विकासखंड जखोली के अंतर्गत ग्राम दानकोट (किमाणा) में देखने को मिल रहा है। यहाँ के निवासी जीतपाल लाल (पुत्र गैणूलाल) पिछले छह वर्षों से एक अदद छत के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। पीड़ित जीतपाल ने बताया कि वर्ष 2020 में हुई भारी बारिश के कारण उनका आवासीय मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गया था। तब से लेकर आज तक वे जखोली विकासखंड से लेकर जिलाधिकारी कार्यालय रुद्रप्रयाग और मुख्यमंत्री दरबार तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन हर जगह से उन्हें सिर्फ कोरे आश्वासन और घोर निराशा ही हाथ लगी है।
हैरानी की बात यह है कि जहाँ देश में खुले में शौच से मुक्ति के ढोल पीटे जा रहे हैं, वहीं इस पीड़ित परिवार के पास आज तक एक शौचालय तक नहीं है। जीतपाल के अनुसार, खंड विकास अधिकारी (BDO) जखोली ने स्वयं उनके घर आकर स्थलीय निरीक्षण भी किया था, लेकिन वह निरीक्षण भी महज एक औपचारिकता बनकर रह गया। रही-सही कसर हाल ही में बसुकेदार में आई दैवीय आपदा ने पूरी कर दी, जिसमें गुप्तकाशी-जखोली मोटर मार्ग का पुस्ता टूटने से उनकी गौशाला भी जमींदोज हो गई। इस भारी नुकसान का भी प्रशासन की ओर से अब तक कोई मुआवजा नहीं दिया गया है। व्यवस्था की इस बेरुखी और प्रशासनिक उदासीनता से तंग आकर पीड़ित जीतपाल लाल ने तीखा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सरकार और प्रशासन केवल झूठे वादे करते हैं। अब उन्होंने भी मन बना लिया है कि इस अनदेखी का करारा जवाब वे 2027 के आगामी विधानसभा चुनाव में अपने वोट की चोट से देंगे।


