आयुर्वेद विभाग और शासन की चुप्पी पर भड़के चिकित्सक।
दूसरे दिन भी 500 से अधिक डॉक्टर्स धरने पर डटे।
देहरादून। अपनी सात सूत्रीय मांगों को लेकर राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा अधिकारी सेवा संघ, उत्तराखंड का अनिश्चितकालीन पूर्ण कार्य बहिष्कार और धरना प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा। आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं निदेशालय में प्रदेशभर से आए 500 से अधिक डॉक्टरों ने एकजुट होकर आयुष विभाग के उच्च अधिकारियों और शासन की उदासीनता के खिलाफ भारी आक्रोश जताया।
स्टेट मीडिया कोर्डिनेटर डॉ. डी. सी. पसबोला ने बताया कि वर्षों से लंबित संवर्गीय प्रकरणों की उपेक्षा से डॉक्टरों में गहरा असंतोष है। इस बीच, भारतीय चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष डॉ. जे. एन. नौटियाल ने भी आयुष मंत्री, मुख्यमंत्री और सचिव को पत्र लिखकर मांगों के शीघ्र समाधान की वकालत की है। आंदोलन को उत्तराखंड फार्मेसी अधिकारी संगठन, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा सहायकों और पंचकर्म सहायकों के प्रांतीय संगठनों का भी व्यापक समर्थन मिला है।
धरना सभा को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष डॉ. नीरज कोहली और महासचिव हरदेव रावत ने स्पष्ट किया कि जब तक शासन द्वारा सात सूत्रीय मांगों पर ठोस कार्रवाई का लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा। उन्होंने इसे केवल डॉक्टरों के हितों की नहीं, बल्कि आयुष पद्धति के सुदृढ़ीकरण और सम्मान की लड़ाई बताया। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन को और अधिक उग्र व व्यापक बनाया जाएगा।


