मयाली बाजार में आवारा पशुओं का आतंक

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मयाली बाजार में आवारा पशुओं का जमवाड़ा।

राहगीर व व्यापारी परेशान।

जखोली। मुख्य बाजार मयाली में इन दिनों आवारा गाय और बैलों की बढ़ती संख्या स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों के लिए सिरदर्द बन चुकी है। बाजार की मुख्य सड़कों और पैदल मार्गों पर दिनभर आवारा पशुओं के जमावड़े के कारण न केवल यातायात बाधित हो रहा है, बल्कि हर समय गंभीर दुर्घटनाओं का अंदेशा भी बना रहता है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, लोग रात के अंधेरे का फायदा उठाकर दूर-दराज के इलाकों से इन पशुओं को बाजार में छोड़ जाते हैं। हैरानी की बात यह है कि कई पशुओं के कानों में टैग भी लगे हुए हैं, जिससे साफ जाहिर होता है कि उनके मालिकों ने उन्हें जानबूझकर लावारिस छोड़ दिया है।

बाजार में उमड़ने वाली भीड़, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को इन पशुओं के कारण आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अक्सर ये पशु आपस में भिड़ जाते हैं, जिससे मुख्य बाजार में अफरा-तफरी और डर का माहौल पैदा हो जाता है। मामले पर गहरी चिंता जताते हुए उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी व पूर्व व्यापार संघ अध्यक्ष सुरेंद्र सकलानी, वासुदेव, टैक्सी यूनियन अध्यक्ष हरीश पुंडीर, जितेंद्र बुटोला, महावीर सिंह बुटोला और संजय सेमवाल सहित तमाम व्यापारियों ने चेताया है कि यदि प्रशासन ने समय रहते कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया, तो यहाँ कभी भी कोई बड़ी अनहोनी घट सकती है।

ग्रामीणों और व्यापारियों की माँग: स्थानीय जनता और व्यापार मंडल ने जिला प्रशासन तथा  पशुपालन विभाग से गुहार लगाई है कि इन आवारा पशुओं को तत्काल पकड़कर नजदीकी गौशालाओं में भेजा जाए। साथ ही, पशुओं को इस तरह लावारिस छोड़ने वाले गैर-जिम्मेदार पशुपालकों को चिह्नित कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए।

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