चारा लेने गई महिला को गुलदार ने बनाया निवाला

पौड़ी में गुलदार का हमला, उत्तराखंड मानव वन्यजीव संघर्ष, पहाड़ में गुलदार का आतंक,
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 पहाड़ की रीढ़ पर गुलदार का वारसल्ड महादेव क्षेत्र के बणासी गावं की घटना

कल्जीखाल में चारा लेने गई महिला को गुलदार ने बनाया निवाला, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

पौड़ी गढ़वाल। जिले के कल्जीखाल ब्लॉक के बणासी गावं में शनिवार सुबह गुलदार ने मवेशियों के लिए चारा लेने गई 65 वर्षीय सुशीला देवी (पत्नी दर्शन सिंह) पर घात लगाकर जानलेवा हमला कर दिया। गुलदार के इस हमले में महिला की मौके पर ही मौत हो गई। दोपहर तक जब वह घर नहीं लौटी, तो परिजनों ने जंगल में खोजबीन शुरू की, जहां उनका खून से लथपथ शव बरामद हुआ। इस हृदयविदारक घटना से पूरे क्षेत्र में मातम पसर गया है।

ब्लॉक प्रमुख प्रकीर्ण नेगी ने बताया की शनिवार सुबह 11:00 बजे के लगभग पट्टी बिल्जाकोट के बणासी गावं की दो महिलाएं शुशीला देवी और शांति देवी गावं के ऊपरी हिस्से में स्थित खेतों में घास काट रही थी इसी दौरान घास काटते वक्त घात लगाए गुलदार ने शुशीला देवी पर हमला कर दिया जिससे मोके पर ही गयी।


आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग की लापरवाही के खिलाफ नारेबाजी करते हुए शव उठाने से इनकार कर दिया। बाद में एसडीएम और रेंजर के आश्वासन तथा पीड़ित परिवार को तत्काल 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता (कुल 4 लाख रुपये मुआवजा) देने के बाद मामला शांत हुआ। डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि गांव में पिंजरा लगा दिया गया है और ड्रोन व दो टीमों के जरिए गुलदार की निगरानी की जा रही है।


यह घटना उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों की उस कड़वी हकीकत को बयां करती है, जहां पहाड़ की रीढ़ कही जाने वाली महिलाएं लगातार वन्यजीवों के निशाने पर हैं। घास-लकड़ी लाने और खेतीबाड़ी की कमान संभालने वाली ये महिलाएं अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए जंगलों पर निर्भर हैं, जिसके कारण वे सबसे ज्यादा मानव-वन्यजीव संघर्ष का शिकार हो रही हैं। पहाड़ों में इस बढ़ते खतरे का मुख्य कारण जंगलों का सिमटना, प्राकृतिक आवासों का विनाश, वनाग्नि और जंगलों में शाकाहारी जीवों के भोजन की कमी है, जिसके चलते गुलदार आबादी वाले क्षेत्रों का रुख कर रहे हैं।


इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए वन विभाग को पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ना होगा। गांवों के नजदीक झाड़ियों का कटान, जंगलों के भीतर ही वन्यजीवों के लिए भोजन-पानी की व्यवस्था (ईको-रेस्टोरेशन), और महिलाओं को सुरक्षित रूप से चारा उपलब्ध कराने के लिए 'फॉडर बैंक' (चारा बैंक) की स्थापना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही, प्रभावित क्षेत्रों में सोलर फेंसिंग, स्ट्रीट लाइट और आधुनिक सर्विलांस सिस्टम लगाकर ही पहाड़ की 'मातृशक्ति' के जीवन को सुरक्षित किया जा सकता है।

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