35 साल बाद भी बेघर है चिरबटिया ITI

चिरबिटिया ITI कब प्रारम्भ हुआ,
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35 साल बाद भी बेघर है चिरबटिया ITI।

 बैशाखी लाल की दी हुई बैशाखी के सहारे हांफ रहा कॉलेज।

जखोली (रुद्रप्रयाग): प्रदेश सरकार एक ओर उत्तराखंड को शिक्षा का हब बनाने और बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर धरातल पर जिले की शिक्षण संस्थाएं आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही हैं। सुविधाओं के इसी अभाव के कारण पहाड़ों से मैदानी क्षेत्रों की ओर युवाओं का पलायन लगातार जारी है।

विकासखंड जखोली के अंतर्गत जनपद रुद्रप्रयाग के सीमांत गांव चिरबटिया में स्थित राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) अपने स्थापना काल से ही भारी अव्यवस्थाओं की मार झेल रहा है।

जन-आंदोलन के बाद मिली थी स्वीकृति

मूल रूप से यह संस्थान पहले जनपद टिहरी के दोबाट्टा में संचालित होता था। क्षेत्र के गरीब परिवारों के बच्चों को कम खर्च में व्यावसायिक शिक्षा दिलाने के उद्देश्य से स्थानीय बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे चिरबटिया स्थानांतरित करने की मांग उठाई। जनता के उग्र आंदोलन को देखते हुए तत्कालीन विधायक मातबर सिंह कंडारी के प्रयासों से साल 1989 में उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे 'चिरबटिया ITI' के नाम से स्वीकृति दी। 1992 में तीन ट्रेडों के साथ यह किराए के भवन में शुरू हुआ।

किराए के भरोसे 27 साल: जर्जर भवन के कारण तकनीकी विभाग ने इसे 2 साल के लिए बंद भी कर दिया था, लेकिन जनता के भारी विरोध के बाद इसे 'जनविकास संस्थान' के भवन में अस्थाई रूप से शिफ्ट किया गया। संस्थान के अध्यक्ष बैशाखी लाल ने इसे यथावत रखने के लिए जगह उपलब्ध कराई। दो वर्ष पूर्व विधायक निधि से भवन निर्माण के लिए भूमि का समतलीकरण तो हुआ, लेकिन निर्माण कार्य आज तक शुरू नहीं हो पाया।

स्टाफ की भारी कमी और सिकुड़ती संख्या

ग्राम प्रधान (लुठियाग) श्रीमती सुदीपा देवी, पूर्व प्रधान रूप सिंह मैहरा, कुंवर सिंह कैंतूरा और सामाजिक कार्यकर्ता सैन सिंह मैहरा ने बताया कि यूपी सरकार के समय से ही इसके भवन निर्माण के लिए ₹2 करोड़ की स्वीकृति की चर्चाएं हवा में तैर रही हैं, जो आज तक धरातल पर नहीं उतरीं।

संस्थान में वर्तमान में केवल दो ट्रेड (इलेक्ट्रिशियन और इलेक्ट्रॉनिक्स) संचालित हैं, जिनमें कुल छात्रों की संख्या सिमटकर महज 26 रह गई है। संस्थान की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ लंबे समय से कई प्रधानाचार्य-01, लिपिक-01 अनुदेशक-02, प्रशिक्षक- 01, कनिष्ठ सहायक-01 व चौकीदार- 01 यह पद रिक्त है।

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