नवरात्रि में मां मठियाणा देवी मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, लोकमान्यताओं में समाहित है देवी की महिमा।
जखोली (रुद्रप्रयाग)। नवरात्रि के पावन अवसर पर विकासखंड जखोली के भरदार क्षेत्र स्थित मठियाणाखाल में मां मठियाणा देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। मंदिर में विधि-विधान से पूजन-अर्चन जारी है। मां मठियाणा को क्षेत्रवासी श्रद्धा से मठियाणा की कालिंका के नाम से पुकारते हैं। प्राचीन लोकमान्यता के अनुसार, पट्टी बांगर स्थित सिरवाड़ी गढ़ के राजवंश में जन्मी बालिका का विवाह भोट (तिब्बत) के राजकुमार से हुआ था। मान्यता है कि राजकुमार की सौतेली मां ने विषैली खीर देकर उनकी हत्या कर दी। पति की मृत्यु का समाचार मिलने पर मां मठियाणा उनके पार्थिव शरीर को लेकर सूर्यप्रयाग (तिलवाड़ा) पहुंचीं, जहां वे पति की चिता के साथ सती हो गईं। इसी घटना के बाद उनके स्वरूप को मां काली से जोड़कर देखा जाने लगा। आचार्य देवी प्रसाद भट्ट के अनुसार, लोककथाओं में मान्यता है कि मां मठियाणा ने जिन स्थानों पर विश्राम किया, वहां उनके मंदिर स्थापित हुए। कोठियाड़ा गांव की चकोड़ी धार में भी माता के रात्रि विश्राम की मान्यता है, जहां लिंग रूप में पूजा की जाती है। सती होने के बाद माता अपने मायके सिरवाड़ी में सहजा भगवती के नाम से प्रसिद्ध हुईं। मान्यता के अनुसार, यहां प्रत्येक 12 वर्ष में विशेष पूजन होता है, जिसमें भरदार पट्टी के गांवों की भागीदारी महत्वपूर्ण मानी जाती है। आचार्य शशिभूषण बमोला ने बताया कि क्षेत्र की धियाणियों यानी बेटियों की मां मठियाणा के प्रति विशेष श्रद्धा है। मंदिर परिसर में लगी घंटियां भक्तों की आस्था का प्रतीक हैं। उन्होंने सरकार से मंदिर का प्रचार-प्रसार और सुविधाओं का विकास करने की मांग की, ताकि यह धार्मिक स्थल स्थानीय लोगों के लिए आजीविका का माध्यम भी बन सके।

