रुद्रप्रयाग में कांग्रेस को झटका, 35 साल पुराने कांग्रेसी ग्यालु लाल भाजपा में शामिल।
खलियान वार्ड के जिला पंचायत सदस्य ने उपेक्षा और सम्मान नहीं मिलने को बताया पार्टी छोड़ने की वजह
रुद्रप्रयाग। जनपद की राजनीति में कांग्रेस को उस समय झटका लगा, जब खलियान वार्ड के जिला पंचायत सदस्य ग्यालु लाल ने करीब 35 वर्षों तक कांग्रेस से जुड़े रहने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ग्रहण कर ली। भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में उनका स्वागत किया गया। उनके इस राजनीतिक बदलाव से जिले में दोनों दलों के बीच स्थानीय समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
ग्यालु लाल ने कांग्रेस छोड़ने की वजह पार्टी में उपेक्षा और अपेक्षित सम्मान एवं स्थान नहीं मिलना बताया। लंबे समय तक कांग्रेस संगठन के साथ काम करने के बाद उनका भाजपा में शामिल होना स्थानीय राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, उनके इस निर्णय का क्षेत्रीय राजनीति पर कितना प्रभाव पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
भाजपा में शामिल होने के बाद ग्यालु लाल ने पार्टी की नीतियों और विचारधारा पर भरोसा जताया। भाजपा नेताओं ने उनके पार्टी में शामिल होने का स्वागत करते हुए इसे संगठन के लिए महत्वपूर्ण बताया। पार्टी नेताओं का मानना है कि केंद्र और प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं तथा विकास संबंधी नीतियों से प्रभावित होकर लोग भाजपा से जुड़ रहे हैं।
ग्यालु लाल के पार्टी छोड़ने से कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे और पुराने कार्यकर्ताओं के साथ संवाद को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। राजनीतिक दलों के लिए लंबे समय से जुड़े कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में उनके दूसरे दल में जाने को कांग्रेस के लिए अपने कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं और संगठन में उनकी भागीदारी पर विचार करने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा में शामिल होने के अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम कठैत, राज्य मंत्री विजय कप्रवाण और जिला पंचायत उपाध्यक्ष ऋतु नेगी मौजूद रहीं। इनके अलावा जिला पंचायत सदस्य जयवर्धन कांडपाल, गंभीर बिष्ट, निर्मला बहुगुणा, किरण देवी, अमित मैखंडी, सरोज राणा, सुबोध बगवाड़ी और नीता बुटोला सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
ग्यालु लाल के भाजपा में आने के बाद अब खलियान वार्ड सहित आसपास के क्षेत्रों में इसके संभावित राजनीतिक प्रभाव पर नजर रहेगी। वहीं, कांग्रेस के सामने अपने पुराने कार्यकर्ताओं के बीच विश्वास बनाए रखने और संगठनात्मक मजबूती पर ध्यान देने की चुनौती रहेगी।

