जखोली बीडीसी बैठक का जनप्रतिनिधियों ने किया धरना देकर बहिष्कार

जखोली बीडीसी बैठक बेल में धरना,
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जखोली बीडीसी बैठक में आक्रोश का विस्फोट।

अधिकारियों की बेरुखी और बजट की किल्लत पर जनप्रतिनिधियों ने किया सामूहिक बहिष्कार।

जखोली (रुद्रप्रयाग): विकासखंड जखोली के सभागार में आयोजित क्षेत्र पंचायत (बीडीसी) की बैठक उस समय हंगामे की भेंट चढ़ गई, जब जनसमस्याओं की अनदेखी से नाराज जनप्रतिनिधियों ने सदन का बहिष्कार कर दिया। बैठक शुरू होते ही जिला स्तरीय अधिकारियों की अनुपस्थिति और पिछली बैठकों में पारित प्रस्तावों पर कोई ठोस कार्यवाही न होने से माहौल गरमा गया। ग्राम प्रधान संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष अजय पुण्डीर के नेतृत्व में प्रधानों और क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने वेल में धरने पर बैठकर नारेबाजी की और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

बैठक में सबसे ज्वलंत मुद्दा बीबीरामजी योजना और बजट की भारी कमी का रहा। जनप्रतिनिधियों ने दोटूक शब्दों में कहा कि एक तरफ बजट का अभाव है, वहीं दूसरी ओर जो कार्य हो रहे हैं, उनमें तकनीकी पेच फंसे हुए हैं। पहाड़ी व दुर्गम क्षेत्रों में नेटवर्क की भारी किल्लत के कारण कार्य पूर्ण होने के बावजूद मस्टररोल 'जीरो' प्रदर्शित हो रहे हैं, जिससे गरीब मजदूरों का भुगतान अधर में लटका है। इस समस्या से आजिज आकर जनप्रतिनिधियों ने मुख्य विकास अधिकारी (CDO) रुद्रप्रयाग को इस योजना के तहत कार्य न करने का सामूहिक प्रस्ताव सौंपते हुए अपनी विवशता व्यक्त की।

आपदा और बुनियादी ढांचे की बदहाली को लेकर भी सदन में तीखी बहस हुई। पूर्वी बांगर क्षेत्र में आई भीषण आपदा के बाद भी वहां अवस्थापना विकास के कार्य ठप पड़े हैं। जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष बजट की दरकार है, लेकिन शासन-प्रशासन की उदासीनता के कारण विकास कार्य कागजों तक सीमित हैं। शिक्षा व्यवस्था की जर्जर हालत का उदाहरण देते हुए पालाकुराली स्कूल का मुद्दा प्रमुखता से उठा। प्रधानमंत्री के 'परीक्षा पर चर्चा' कार्यक्रम से सुर्खियों में आए इस स्कूल की हालत आज बदतर है; लोक निर्माण विभाग की दीवार से लगातार मलबा स्कूल में घुस रहा है और आंगन पिछले चार वर्षों से क्षतिग्रस्त है। प्रतिनिधियों ने सवाल उठाया कि जब हाई-प्रोफाइल स्कूलों की यह स्थिति है, तो दूरस्थ गांवों के विद्यालयों का क्या हाल होगा, जहां छतों से पानी टपक रहा है और शौचालय तक की सुविधा नहीं है।

इसके साथ ही, मनरेगा के तहत सामग्री भुगतान कई वर्षों से लंबित होने पर गहरा रोष व्यक्त किया गया। सदस्यों ने आरोप लगाया कि किसी अदृश्य शह पर जानबूझकर भुगतान रोका जा रहा है, जिससे गांवों में विकास की गति थम गई है। हाल ही में निलंबित शिक्षकों के स्थान पर नई नियुक्ति न होने और पेयजल संकट जैसे मुद्दों पर भी कोई संतोषजनक जवाब न मिलने पर जनप्रतिनिधियों ने बैठक का पूर्ण बहिष्कार कर विकासखंड मुख्यालय के प्रांगण में धरना दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक बजट की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं होती और अधिकारियों का रवैया नहीं बदलता, तब तक विकास की बातें केवल छलावा हैं।

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