जखोली साधन सहकारी समिति के विलय का विरोध

जखोली साधन सहकारी समिति के विलय पर भड़के लोग, पुनर्स्थापना की मांग,
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जखोली साधन सहकारी समिति के विलय का विरोध।

 जनप्रतिनिधियों ने दी आंदोलन की चेतावनी।

25 राजस्व ग्रामों और 16 ग्राम सभाओं से जुड़ी थी समिति, जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजकर यथावत बहाली की मांग

जखोली। विकासखंड मुख्यालय जखोली स्थित बहुद्देशीय साधन सहकारी समिति को अन्यत्र विलय किए जाने का क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने विरोध किया है। क्षेत्रवासियों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजकर समिति को पूर्व की भांति जखोली में ही संचालित किए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि समिति के अन्यत्र विलय से दूरदराज के ग्रामीणों, सीमांत किसानों, वृद्धों, विधवाओं और दिव्यांग लाभार्थियों को सहकारी सेवाओं का लाभ लेने के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है।

ज्ञापन में कहा गया है कि जखोली स्थित साधन सहकारी समिति लंबे समय से क्षेत्रीय ग्रामीणों की जरूरतों को पूरा करती आ रही थी। समिति के अंतर्गत 25 राजस्व ग्राम और 16 ग्राम सभाएं आती थीं। क्षेत्रीय लोगों के अनुसार समिति की स्थापना वर्ष 1950 से 1970 के दशक के बीच हुई थी। इसके बाद 6 अप्रैल 1977 को लामर पालाकुराली (जखोली) के नाम से उक्त साधन सहकारी समिति लिमिटेड का शिलान्यास किया गया था। बाद में इसका संचालन जखोली साधन सहकारी समिति लिमिटेड के रूप में किया जाता रहा।

पूर्व प्रधान विजेंद्र सिंह मेवाड़ और अनिल भट्ट सहित अन्य लोगों ने कहा कि समिति का अपना कार्यालय और नया भवन विकासखंड मुख्यालय जखोली के समीप स्थित है। यहां दो बचत बैंक/मिनी बैंक भी संचालित हो रहे थे, जिनसे क्षेत्र की जनता को स्थानीय स्तर पर बैंकिंग एवं सहकारी सेवाएं उपलब्ध हो रही थीं। आरोप है कि विभागीय अधिकारियों ने स्थानीय जनता और जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लिए बिना समिति का अन्यत्र विलय कर दिया।

पूर्व प्रधान विजेंद्र सिंह मेवाड़ ने कहा कि समिति के विलय से ग्रामीणों को अनावश्यक रूप से दूर जाना पड़ रहा है और इससे विशेष रूप से जरूरतमंद एवं सीमांत वर्ग प्रभावित हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समिति को शीघ्र जखोली में यथावत पुनर्स्थापित नहीं किया गया तो क्षेत्रीय जनता व्यापक जनांदोलन के साथ न्यायालय की शरण लेने को बाध्य होगी। इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।


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