नगदेव मंदिर पौंठी में नए गेहूं की पूड़ी का चढ़ा भोग।
भादों की संक्रांति पर दिखी लोकपरंपरा की अनूठी छटा।
पौंठी। गढ़वाल की समृद्ध लोकसंस्कृति, आस्था और सामूहिक एकता की अनूठी झलक सिलगढ़ क्षेत्र के पौंठी गांव में भादों की संक्रांति के अवसर पर देखने को मिली। गांव के आराध्य ग्रामदेवता नगदेव के मंदिर में ग्रामीणों ने नए गेहूं से तैयार पूड़ी का प्रथम भोग अर्पित कर सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस दौरान सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। ग्रामीण पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ अपने-अपने घरों से पूड़ी लेकर मंदिर पहुंचे और विधि-विधान से ग्रामदेवता की पूजा-अर्चना की।
मंदिर के अर्चक देवी प्रसाद उनियाल ने बताया कि नगदेव को नए गेहूं की फसल का प्रथम भोग अर्पित करने की परंपरा सदियों पुरानी है। भादों की संक्रांति के दिन गांव में नाते-रिश्तेदारों और धियांण को आमंत्रित करने की परंपरा भी निभाई जाती है। यही वजह है कि पौंठी के ग्रामीण पूरे वर्ष इस विशेष पर्व का इंतजार करते हैं।
ग्राम प्रधान सुमन देवी ने बताया कि करीब 400 परिवारों वाले पौंठी गांव के लिए भादों की संक्रांति केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और सामूहिक एकता का प्रतीक भी है। प्रत्येक परिवार नए गेहूं के आटे से पूड़ी बनाकर नगदेव मंदिर में अर्पित करता है। इस अवसर पर विजय सिंह राणा, शंकर सिंह राणा, क्षेत्र पंचायत सदस्य वीरेंद्र सिंह रावत, रमेश कंडारी, हयात सिंह राणा, शिशुपाल सिंह नेगी, गोपाल थपलियाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु उपस्थित रहे।


