रुद्रप्रयाग में 2027 की चुनावी आहट

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रुद्रप्रयाग में 2027 की चुनावी आहट।

 क्या भाजपा में चेहरे को लेकर है चर्चा, कांग्रेस के सामने वापसी की चुनौती।

रुद्रप्रयाग। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर रुद्रप्रयाग सीट पर अभी से सियासी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। भाजपा के सामने जहां लगातार तीसरी बार सीट पर मजबूत पकड़ बनाए रखने की चुनौती होगी, वहीं कांग्रेस पिछली चुनावी स्थिति को बेहतर करने की कोशिश में जुटी नजर आएगी। वर्तमान विधायक एवं कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी 2017 और 2022 में लगातार दो बार इस सीट से जीत दर्ज कर चुके हैं। 2022 में उन्होंने कांग्रेस के प्रदीप प्रसाद थपलियाल को 9,802 मतों के अंतर से पराजित किया था। इससे पहले 2017 में भी भाजपा ने इस सीट पर 14 हजार से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। ऐसे में मौजूदा विधायक के पास क्षेत्र में मजबूत चुनावी आधार होने के साथ सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी है।

हालांकि 2027 की संभावित चुनावी तस्वीर को लेकर भाजपा के भीतर प्रत्याशी चयन पर चर्चाएं होना स्वाभाविक माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों के एक वर्ग का मानना है कि पार्टी यदि स्थानीय समीकरणों, संगठनात्मक संतुलन और नए मतदाताओं की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखती है तो किसी नए चेहरे पर भी विचार कर सकती है। इसे फिलहाल किसी मौजूदा विधायक के टिकट को लेकर संकेत के तौर पर नहीं, बल्कि चुनाव से पहले होने वाली संभावित रणनीतिक कवायद के रूप में देखा जाना चाहिए। दूसरी ओर, भरत सिंह चौधरी की लगातार दो चुनावी जीत और वर्तमान में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी उन्हें स्वाभाविक रूप से भाजपा के प्रमुख चेहरों में बनाए रखती है। ऐसे में अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व द्वारा जमीनी फीडबैक, संगठन की स्थिति और चुनावी समीकरणों के आकलन के बाद ही होने की संभावना है।

कांग्रेस की बात करें तो प्रदीप प्रसाद थपलियाल का नाम संभावित दावेदारों में प्रमुख माना जा रहा है। 2022 में कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर उन्होंने 19,858 मत हासिल किए थे, जबकि 2017 में वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरकर तीसरे स्थान पर रहे थे। इसलिए कांग्रेस यदि इस बार भी उन पर भरोसा जताती है तो उनके सामने संगठन को सक्रिय करने और पिछले चुनाव में भाजपा से बने मतों के अंतर को कम करने की बड़ी चुनौती होगी। वहीं निर्दलीय उम्मीदवारों की संभावित मौजूदगी मुकाबले को बहुकोणीय बना सकती है। 2022 में निर्दलीय मातबर सिंह कंडारी को 4,838 और उत्तराखंड क्रांति दल के मोहित डिमरी को 4,623 मत मिले थे। यह आंकड़ा बताता है कि भाजपा और कांग्रेस के अलावा तीसरे विकल्प की भूमिका भी चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती है।

यूकेडी के लिए भी 2027 का चुनाव अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का अवसर हो सकता है। गैरसैंण समेत क्षेत्रीय मुद्दे, स्थानीय युवाओं की अपेक्षाएं, रोजगार से जुड़े सवाल चुनावी विमर्श में जगह बना सकते हैं। यदि क्षेत्रीय दल इन मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाते हैं तो उसका असर प्रमुख दलों के मत प्रतिशत पर पड़ सकता है। हालांकि अभी चुनाव में समय है और स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं। भाजपा के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौती संगठन के भीतर पूर्ण समन्वय बनाए रखना होगी, जबकि कांग्रेस को निष्क्रियता से बाहर निकलकर बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ानी होगी। फिलहाल रुद्रप्रयाग में मुकाबले की तस्वीर स्पष्ट नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि 2027 में टिकट चयन, संगठनात्मक एकजुटता, स्थानीय मुद्दे और निर्दलीय-क्षेत्रीय प्रत्याशियों की भूमिका इस सीट के चुनावी परिणाम को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे।

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