पूर्व PA प्रमोद नौटियाल के कमरे से मिला खजाना

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बदरीनाथ धाम चढ़ावा घोटाला: पूर्व PA प्रमोद नौटियाल के कमरे से मिला खजाना।

 36 करोड़ की गिनती और दर्जनों कर्मचारी SIT की जांच के दायरे में।

चमोली/देहरादून। प्रसिद्ध तीर्थस्थल बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए जाने वाले चढ़ावे में बड़े पैमाने पर हुई धांधली और चोरी का मामला अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। मामले की पड़ताल कर रही विशेष जांच दल  ने मुख्य आरोपी बदरी-केदार मंदिर समिति  के पूर्व वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर बदरीनाथ में एक बड़ी और चौंकाने वाली कार्रवाई को अंजाम दिया है। आरोपी की निशानदेही पर बदरीनाथ स्थित नीलकंठ वीवीआईपी गेस्ट हाउस की पहली मंजिल पर बने उसके सरकारी आवास का ताला खुलवाकर ली गई तलाशी में मंदिर से जुड़े बताए जा रहे अति-कीमती नजराने (उपहार) और 500-500 रुपये की गड्डियों के रूप में भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई है। पूरी तलाशी और बरामदगी की प्रक्रिया को विधिक साक्ष्य बनाने के लिए एसआईटी द्वारा इसकी गहन वीडियोग्राफी कराई गई है। अब जांच एजेंसी बरामद सामग्री का मंदिर के आधिकारिक दान-रिकॉर्ड से मिलान कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह खजाना और नकदी किस तरह मंदिर प्रबंधन के कड़े सुरक्षा घेरे से बाहर निकालकर आरोपी के कमरे तक पहुंची।

एसआईटी की जांच का दायरा केवल बदरीनाथ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका जाल देहरादून तक फैल चुका है। बदरीनाथ में छापेमारी के दौरान ही एसआईटी की एक अन्य विशेष टीम ने देहरादून के नेहरू कॉलोनी क्षेत्र स्थित प्रमोद नौटियाल के निजी आवास पर जोरदार छापा मारा। यहाँ अधिकारियों ने आरोपी की अचल संपत्तियों, विभिन्न बैंक खातों और पिछले कुछ वर्षों के वित्तीय लेनदेन से जुड़े दर्जनों दस्तावेजों को कब्जे में लेकर खंगालना शुरू कर दिया है। जांच एजेंसी यह कड़ियां जोड़ने में जुटी है कि चढ़ावे की धांधली से अर्जित की गई अवैध राशि का उपयोग किन-किन संपत्तियों को खरीदने, बेनामी निवेश करने या परिजनों के खातों में ट्रांसफर करने में किया गया है।

इस पूरे प्रकरण ने बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे की गणना और उसकी निगरानी प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चालू यात्रा सीजन में 2 जुलाई तक दानपात्रों को कुल 34 बार खोला और गिना गया था, जिसमें लगभग 36 करोड़ रुपये की भारी-भरकम नकदी दर्ज की गई थी। एसआईटी अब इस 36 करोड़ रुपये की गिनती की पूरी प्रक्रिया, उससे संबंधित पंजिकाओं और सीसीटीवी (CCTV) फुटेज की बारीकी से पड़ताल कर रही है। विशेष रूप से 21 जून के बाद की तमाम फुटेज और दान की गिनती के समय अपनाई गई सुरक्षा व्यवस्था की गहन जांच की जा रही है। जांच टीम का मुख्य फोकस इस बिंदु पर है कि जब चढ़ावे की गिनती और उसका रखरखाव कई परतों वाली प्रशासनिक निगरानी में होता था, तो इतनी बड़ी स्तर की गड़बड़ी और चोरी किस स्तर पर तथा किसकी सांठगांठ से संभव हो सकी।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसआईटी अपनी कार्रवाई को केवल मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल तक सीमित न रखकर मंदिर प्रबंधन से जुड़े अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कर रही है। दान प्रबंधन, सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था से जुड़े आधा दर्जन से अधिक कर्मचारी अब जांच के सीधे रडार पर आ चुके हैं। इनमें सीसीटीवी मॉनिटरिंग रूम के संचालक, भंडार प्रभारी, वरिष्ठ प्रशासनिक सहायक और लेखा लिपिक शामिल हैं, जिनसे मैराथन पूछताछ का दौर जारी है।

   एसआईटी यह स्पष्ट करने का प्रयास कर रही है कि क्या इस संगठित गबन में मंदिर समिति के कुछ अन्य रसूखदार चेहरों का भी शह या संरक्षण प्राप्त था। आरोपी से पूछताछ और बरामद दस्तावेजों के आधार पर आने वाले दिनों में कुछ और ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। फिलहाल विवेचना जारी है और एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही इस बहुचर्चित चढ़ावा कांड की पूरी सच्चाई और सभी दोषियों के नाम आधिकारिक तौर पर सामने आ सकेंगे।


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