मनसूना में गूँजी बाल श्रम के खिलाफ आवाज़, ग्रामीणों को दी गई कानूनी अधिकारों की जानकारी।
रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के दिशा-निर्देशन एवं जिला न्यायाधीश के मार्गदर्शन में आज 'बाल श्रम के विरुद्ध विश्व दिवस' के अवसर पर जनपद के दूरस्थ ग्राम मनसूना में एक भव्य विधिक जागरूकता एवं साक्षरता शिविर का सफल आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) की सचिव पायल सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बाल अधिकारों का संरक्षण करना और बाल श्रम जैसी सामाजिक कुप्रथा के खिलाफ जन-जागरूकता फैलाना था।
शिविर को संबोधित करते हुए सचिव पायल सिंह ने ग्रामीणों व अभिभावकों को बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम के कड़े प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को होटल, ढाबे, दुकान या घरेलू कार्यों में रखना गंभीर कानूनन अपराध है। ऐसा करने वाले नियोक्ताओं को 6 महीने से 2 वर्ष तक की जेल और ₹20,000 से ₹50,000 तक का जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा, 14 से 18 वर्ष के किशोरों को खतरनाक व जोखिमपूर्ण उद्योगों में काम पर लगाना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
सचिव ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा का अधिकार (RTE) दिलाने और किसी भी उत्पीड़न के खिलाफ न्याय दिलाने के लिए DLSA मुफ्त विधिक सहायता और सरकारी वकील उपलब्ध कराता है। आपात स्थिति के लिए उन्होंने टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की भी जानकारी दी।
शिविर में मौजूद रिटेनर अधिवक्ता एवं असिस्टेंट लीगल डिफेंस काउंसिल ने बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों के पुनर्वास और उनकी शिक्षा पर जोर दिया। इस दौरान अधिकारियों ने ग्रामीणों की शिकायतों व समस्याओं को सुना और मौके पर ही उचित विधिक परामर्श दिया। साथ ही, ग्रामीणों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और लोक अदालत के लाभों के प्रति भी जागरूक किया गया।


