डॉ. बी.पी. भट्ट बने भरसार वानिकी एवं औद्यानिकी विवि के नए कुलपति।
देहरादून। राज्यपाल एवं कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने डॉ. भगवती प्रसाद भट्ट को वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली उत्तराखण्ड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार (पौड़ी गढ़वाल) का नया कुलपति नियुक्त किया है। राजभवन से 11 जून 2026 को जारी आदेश के अनुसार, डॉ. भट्ट का कार्यकाल कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्ष अथवा अगले आदेश (जो भी पहले हो) तक के लिए होगा। इस नई नियुक्ति के साथ ही कुलपति के कार्य दायित्वों को लेकर गत 15 दिसंबर 2025 को लागू की गई अंतरिम व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है।
यह गरिमामयी नियुक्ति उत्तर प्रदेश कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय अधिनियम, 1958 (उत्तराखण्ड राज्य में यथा प्रवृत्त एवं संशोधित) की धारा-11 के तहत गठित अन्वेषण समिति द्वारा प्रस्तुत पैनल के आधार पर की गई है। वर्तमान में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), नई दिल्ली में विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) के पद पर सेवाएं दे रहे डॉ. भट्ट की इस नियुक्ति को विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, शोध और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने तथा इसे नई दिशा देने की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मूल रूप से उत्तराखण्ड के ही रहने वाले हैं डॉ. भट्ट, कृषि एवं वानिकी क्षेत्र का है लंबा अनुभव मूल रूप से उत्तराखण्ड (रुद्रप्रयाग गढ़वाल) के कोठियाड़ा के रहने वाले डॉ. भगवती प्रसाद भट्ट का कृषि, वानिकी और कृषि-वानिकी (Agroforestry) के क्षेत्र में एक बेहद समृद्ध और लंबा करियर रहा है। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा (एम.एससी. और पी.एचडी.) हेनविंनब (एचएनबी) गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर से पूरी की, जहाँ उन्होंने शुरुआती दौर में व्याख्याता के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तहत पूर्वोत्तर पर्वतीय क्षेत्र संस्थान (मेघालय और नागालैंड) में बतौर वरिष्ठ वैज्ञानिक और संयुक्त निदेशक के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वह लंबे समय तक आईसीएआर के पूर्वी क्षेत्र अनुसंधान परिसर, पटना (बिहार) के निदेशक भी रहे हैं।
कृषि अनुसंधान और पर्वतीय कृषि विकास में उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉ. भट्ट को राष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है, जिनमें 'स्वामीनाथन राष्ट्रीय पुरस्कार', 'डॉ. राजेंद्र प्रसाद पुरस्कार', और आईसीएआर का 'फखरुद्दीन अली अहमद पुरस्कार' प्रमुख हैं। वे नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (NAAS) के निर्वाचित फेलो भी हैं।
राजभवन द्वारा इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई के लिए आदेश की प्रतिलिपि मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री कार्यालय, कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) तथा विश्वविद्यालय प्रशासन को प्रेषित कर दी गई है। डॉ. भट्ट के विशाल प्रशासनिक अनुभव और पर्वतीय कृषि व वानिकी पर उनकी मजबूत पकड़ से भरसार विश्वविद्यालय में शोध और अकादमिक स्तर पर एक नए युग की शुरुआत होने की उम्मीद जताई जा रही है।


