सरकारी धन की बर्बादी: चिरबटिया में 26 लाख फूंकने के बाद भी पर्यटन सूचना केंद्र पर लटके हैं ताले।
भवन निर्माण में लगे 10 लाख, तो मरम्मत पर उड़ा दिए 16 लाख; चारधाम यात्रा मार्ग पर स्थित केंद्र सफेद हाथी साबित।
जखोली - जनपद टिहरी और रुद्रप्रयाग की सीमा पर स्थित खूबसूरत पर्यटक स्थल चिरबटिया में सरकारी धन के दुरुपयोग का एक बड़ा मामला सामने आया है। वर्ष 2009-10 में गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) द्वारा क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लगभग 10 लाख रुपये की लागत से एक 'पर्यटन सूचना केंद्र' का निर्माण कराया गया था। लेकिन विडंबना देखिए कि निर्माण के डेढ़ दशक बाद भी इस केंद्र पर आज तक सरकारी ताले लटके हुए हैं। स्थानीय जनता की समझ से परे है कि आखिर किस योजना के तहत इस अनुपयोगी भवन पर लाखों रुपये पानी की तरह बहा दिए गए।
शुरुआती दौर में लाखों की धनराशि खर्च करने के बावजूद सरकार को इस केंद्र से 10 रुपये की आय भी नसीब नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि इस सूचना केंद्र को मुख्य बाजार चिरबटिया से हटाकर एक ऐसे एकांत स्थान पर बनाया गया है, जहाँ आम पर्यटकों की नजर ही नहीं पड़ती। स्थानीय लोगों के अलावा बाहरी राज्यों से आने वाले सैलानियों को इस केंद्र के अस्तित्व का पता तक नहीं चल पाता। जबकि चिरबटिया चारधाम यात्रा का एक मुख्य पड़ाव है, जहाँ यात्रा सीजन के दौरान यदि इस केंद्र का सही संचालन होता, तो इससे सरकार को भारी राजस्व और स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल सकता था।
सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि जब 12 वर्षों तक बंद रहने के कारण यह भवन पूरी तरह जीर्ण-शीर्ण हो गया, तो जिम्मेदार विभाग ने इसकी सुध लेने के बजाय एक नया खेल रच दिया। वर्ष 2023-24 में इस बंद पड़े भवन की मरम्मत के नाम पर टेंडर के जरिए ₹16 लाख की भारी-भरकम राशि और फूंक दी गई। सवाल उठना लाजिमी है कि जिस भवन का मूल निर्माण ₹10 लाख में हुआ था, उसकी मरम्मत पर ₹16 लाख कैसे खर्च हो गए? हद तो यह है कि पारदर्शिता को ताक पर रखकर, मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद भी आज तक मौके पर स्वीकृत धनराशि का कोई साइन बोर्ड नहीं लगाया गया है, ताकि आम जनता को सच का पता न चल सके।
पर्यटन के नाम पर हो रही इस वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक उदासीनता को लेकर स्थानीय जनता में गहरा रोष है। क्षेत्र पंचायत सदस्य श्रीमती लौंगा देवी पंवार, पूर्व प्रधान दिनेश सिंह कैंतूरा, पूर्व प्रधान रूप सिंह मैहरा, पूर्व उपप्रधान त्रिलोक सिंह कैंतूरा, तथा सामाजिक कार्यकर्ता सुनील सिंह कैंतूरा, रूप सिंह व कमल सिंह आदि ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
"पर्यटन विभाग और प्रशासन केवल बजट खपाने के लिए इस भवन पर बार-बार पैसा खर्च कर रहा है। यदि प्रशासन इसे गंभीरता से लेकर यात्रा सीजन में संचालित करवाता, तो यह क्षेत्र के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होता। लेकिन करोड़ों की चारधाम यात्रा के बावजूद इस केंद्र पर ताले लटके रहना विभागीय नाकामी का जीता-जागता सबूत है।"
— स्थानीय ग्रामीण व जनप्रतिनिधि


