दिल्ली होटल अग्निकांड: बेगुनाह शेफ की गिरफ्तारी पर भड़का उत्तराखंड, सियासत और जनता एकजुट।
देहरादून: दिल्ली के मालवीय नगर स्थित ‘फ्लोरिश स्टे बी एंड बी’ होटल में हुए भीषण अग्निकांड का मामला अब पूरी तरह से सियासी और सामाजिक रंग ले चुका है। हादसे में 21 मासूम जिंदगियों के खत्म होने के बाद दिल्ली पुलिस द्वारा उत्तराखंड निवासी 65 वर्षीय शेफ केशव नेगी की गिरफ्तारी ने देवभूमि में आक्रोश की आग भड़का दी है। नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे इस ‘मौत के जाल’ में एक गरीब कुक को बलि का बकरा बनाए जाने के आरोपों के बीच, उत्तराखंड की पूरी राजनीतिक बिरादरी और आम जनता एकजुट खड़ी नजर आ रही है।
जांच में सामने आया है कि जिस 5 मंजिला होटल में मात्र 6 कमरों की अनुमति थी, वहां बेसमेंट समेत 25 कमरे अवैध रूप से संचालित हो रहे थे। बिना फायर NOC, सील खिड़कियों और एक ही निकास द्वार वाले इस परिसर में आग लगने पर जब मालिकान की लापरवाही साफ उजागर हो रही थी, तब पुलिस द्वारा रसोई संभालने वाले बुजुर्ग शेफ को कथित लापरवाही के आरोप में गिरफ्तार करना न्यायसंगत नहीं प्रतीत होता। कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल का यह तर्क बिल्कुल सटीक बैठता है कि फायर सेफ्टी सुनिश्चित करना एक शेफ की नहीं बल्कि प्रबंधन की जिम्मेदारी होती है।
इस संकट की घड़ी में उत्तराखंड के आम आदमी को परदेस में भी लावारिस न छोड़ने और उसे पूरा सहारा देने की जो राजनीतिक व सामाजिक पहल देखने को मिली है, वह बेहद सराहनीय है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने न सिर्फ दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से बात कर निष्पक्ष जांच और बेगुनाह को न्याय दिलाने का भरोसा लिया, बल्कि पीड़ित की बेटी कनिष्का से बात कर राज्य सरकार की ओर से हर संभव मदद का हाथ बढ़ाया। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा भी हरसंभव कानूनी सहयोग देने का संकल्प यह दर्शाता है कि जब बात उत्तराखंड के किसी आम नागरिक के आत्मसम्मान और अधिकारों की आएगी, तो दलगत राजनीति से ऊपर उठकर पूरा प्रदेश एक मजबूत ढाल बनकर खड़ा हो जाएगा।


