चन्दी गाँव की महिलाओं ने अवैध शराब और नशे के खिलाफ खोला मोर्चा

अवैध शराब तस्करी के कारोबार से टूटते पहाड़ के सपने,
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पहाड़ की अस्मिता बचाने को महिलाओं का 'रणघोष': चन्दी गाँव की महिलाओं ने अवैध शराब और नशे के खिलाफ खोला मोर्चा।


महिलाओं का यह 'रणघोष' व्यवस्था और समाज के उन लोगों के लिए आईना है जो नशे के कारोबार पर आँखें मूंदे बैठे हैं।

जखोली- पहाड़ की नारी जिसे हम 'पहाड़ की रीढ़' कहते हैं, आज एक बार फिर अपने अस्तित्व और परिवार को बचाने के लिए सड़क पर उतर आई है। पलायन, बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और शिक्षा के अभाव जैसी चुनौतियों से जूझती पहाड़ की महिलाओं के सब्र का बांध अब अवैध शराब के बढ़ते कारोबार ने तोड़ दिया है। विकासखंड के ग्राम चन्दी की महिलाओं ने सांकला बाजार में बिक रही अवैध शराब और नशे की लत में डूबते युवा वर्ग के खिलाफ बिगुल फूंकते हुए एक सशक्त आंदोलन की शुरुआत की है।

जनपद रुद्रप्रयाग, विकासखण्ड जखोली के सांकला बाजार में अवैध शराब की बिक्री से आक्रोशित महिलाओं ने संगठित होकर एक जुलूस निकाला और नारेबाजी करते हुए शराब माफियाओं को सख्त लहजे में चेतावनी दी। महिलाओं का स्पष्ट संदेश है कि पैसे की भूख और झूठी शान-शौकत के चक्कर में शराब माफिया पहाड़ की जवानी को बर्बाद कर रहे हैं। गाँव-गाँव में खुले अवैध बिक्री केंद्रों ने न केवल घर उजाड़े हैं, बल्कि शांतिप्रिय पहाड़ी संस्कृति को भी कलंकित किया है। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने हुंकार भरी कि अब वे खामोश नहीं बैठेंगी और नशे के इस जाल को जड़ से उखाड़ फेंकेंगी।

 इस आंदोलन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी सामाजिक अनुशासन है। विजेश्वरी देवी, पिंकी देवी, तनुजा देवी और पुष्पा देवी समेत दर्जनों महिलाओं ने सार्वजनिक रूप से शपथ ली कि वे अपने घरों में होने वाले किसी भी मांगलिक या अन्य कार्यक्रमों में शराब का प्रयोग नहीं होने देंगी। महिलाओं ने एकजुट होकर यह निर्णय लिया है कि यदि गाँव के भीतर किसी कार्यक्रम में शराब परोसी गई या कोई अवैध बिक्री में संलिप्त पाया गया, तो उस पर ₹51,000 का भारी जुर्माना लगाया जाएगा। प्रमिला देवी, सुनीता देवी, संगीता देवी, कविता देवी, ममता देवी, पूनम देवी, लक्ष्मी देवी और राजेश्वरी देवी ने बताया कि यह जुर्माना केवल आर्थिक दंड नहीं, बल्कि सामाजिक मर्यादा को अक्षुण्ण रखने का एक संकल्प है।

 पहाड़ के अधिकतर गांवों में पुरुष और युवा वर्ग नशे की गिरफ्त में हैं। दिन भर शराब की जुगत में रहने वाले पुरुषों के कारण परिवार का पूरा बोझ महिलाओं के कंधों पर आ गया है। जहाँ एक ओर शराब माफिया मुनाफा कमा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पहाड़ की स्त्रियाँ मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेल रही हैं। महिलाओं का कहना है कि शराबियों के आतंक और नशे की लत ने बच्चों के भविष्य पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। चन्दी गाँव की यह पहल अब न केवल अवैध शराब बेचने वालों को मंथन करने पर मजबूर करेगी, बल्कि अन्य गांवों के लिए भी एक नजीर बनेगी।

चन्दी की महिलाओं का यह 'रणघोष' व्यवस्था और समाज के उन लोगों के लिए आईना है जो नशे के कारोबार पर आँखें मूंदे बैठे हैं। यह आंदोलन केवल शराब के खिलाफ नहीं, बल्कि पहाड़ के टूटते परिवारों को बचाने और आने वाली पीढ़ी को एक स्वच्छ वातावरण देने की जद्दोजहद है। यदि यह पहल रंग लाती है, तो निश्चित रूप से पहाड़ की घाटियों में शराब के आतंक से निजात मिलेगी और खुशहाली का नया दौर शुरू होगा।


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