पलायन और नशे की दोहरी मार झेलते गांवों के बीच उच्छना की नई पहल, सार्वजनिक कार्यों में शराब पर पूर्ण प्रतिबंध।
पलायन और नशे का खतरनाक गठजोड़, कड़ा आर्थिक दंड: उल्लंघन पर ₹51,000 का जुर्माना।
रुद्रप्रयाग। एक ओर उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र पलायन की विभीषिका झेल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नशे का बढ़ता चलन बचे-खुचे ग्रामीण परिवेश के लिए बड़ा खतरा बन गया है। इस गंभीर स्थिति को भांपते हुए जनपद की ग्राम पंचायत उच्छना ने सामाजिक सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। ग्राम प्रधान नीलम रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर सार्वजनिक कार्यों में शराब के उपयोग और उसे परोसने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
गांव की मर्यादा और सामाजिक वातावरण को सुरक्षित रखने के लिए पंचायत ने सख्त रुख अपनाया है। बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि किसी भी सार्वजनिक या मांगलिक कार्यक्रम में शराब परोसी जाती है, तो आयोजक पर 51,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। ग्रामीणों का मानना है कि केवल नसीहत से बदलाव संभव नहीं था, इसलिए इस कड़े आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है ताकि युवाओं और परिवारों को नशे के गर्त में जाने से बचाया जा सके।
पहाड़ के गांवों की वर्तमान स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। पलायन के कारण मकान खंडहर हो रहे हैं और खेत बंजर पड़ चुके हैं। जंगली जानवरों के आतंक और मूलभूत सुविधाओं के अभाव में खेती से विमुख होकर लोग शहरों की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे में गांवों में गिनती के लोग बचे हैं, लेकिन वहां भी नशे का जाल तेजी से फैल रहा है।
अक्सर गांवों में मुट्ठी भर शराबी पूरे समाज की शांति भंग कर रहे हैं। ऊपर से गांव-गांव में सक्रिय अवैध शराब तस्करों ने स्थिति को और भयावह बना दिया है। उच्छना पंचायत की यह पहल सीधे तौर पर उन तत्वों को चेतावनी है जो सीमित आबादी वाले इन गांवों को नशे की आग में झोंक रहे हैं।
इस निर्णय का सबसे जोरदार स्वागत मातृशक्ति ने किया है। महिला मंगल दल की अध्यक्ष सुनीता देवी, उपाध्यक्ष ऊषा देवी और कोषाध्यक्ष उर्मिला देवी सहित गांव की महिलाओं का कहना है कि शराब न केवल आर्थिक बल्कि पारिवारिक सुख-शांति को भी दीमक की तरह चाट रही है। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और समर्थन ने इस प्रस्ताव को एक सामाजिक आंदोलन का रूप दे दिया है।
ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस अनुशासन से न केवल पारिवारिक कलह थमेगी, बल्कि गांव की एकता और सामाजिक ढांचे को भी मजबूती मिलेगी। यह पहल अन्य पंचायतों के लिए भी एक मार्गदर्शक सिद्ध हो सकती है।



