देवल गांव में 'स्पेशल कंपोनेंट प्लान' की खंडहर दुकानें बन सकती हैं गुलदार का ठिकाना

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देवल गांव मे स्पेशल कम्पोनेन्ट प्लान से बनी खंडर दुकानो को‌ हटाने की मांग।

30 सालो से खंडर पडे़ दुकानो के आगे पीछे उगी है बड़ी बड़ी झाड़ियां, अक्सर गुलदार के छिपे होने की बनी रहती है आंशका।

जखोली (रुद्रप्रयाग): विकासखंड जखोली की ग्राम पंचायत देवल में तीन दशकों से खंडहर पड़ी सरकारी दुकानें अब ग्रामीणों के लिए मौत का सबब बनती जा रही हैं। 'स्पेशल कंपोनेंट प्लान' के तहत वर्ष 1982-83 में निर्मित ये दुकानें देख-रेख के अभाव में झाड़ियों से पट चुकी हैं, जो  गुलदार व अन्य हिंसक जानवरों के छिपने का सुरक्षित ठिकाना बन सकता है। इस गंभीर समस्या को लेकर निवर्तमान ग्राम प्रधान शम्भू प्रसाद उनियाल ने जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग को पत्र भेजकर इन खंडहरों को तत्काल ध्वस्त करने की मांग की है।

क्षेत्र में गुलदार का आतंक इस कदर रहा है कि ग्रामीण शाम होते ही उस समय घरों में दुबकने को मजबूर थे क्योंकि गुलदार द्वारा लगातार घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा था गौरतलब है कि 25 फरवरी 2025 को देवल गांव में ही श्रीमती सर्वेश्वरी देवी को गुलदार ने घास काटते समय अपना निवाला बना लिया था। पिछले दो वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो फरवरी 2024 से जून 2025 के बीच महरगांव, ढूमकी, ललूड़ी, मयाली और खरियाल जैसे क्षेत्रों में गुलदार ने एक के बाद एक कई हमले किए। इस दौरान श्रीमती रूपा देवी और श्रीमती रामेश्वरी देवी सहित 3 महिलाओं को अपनी जान गंवानी पड़ी। हालांकि, भारी जन-आक्रोश और विभाग की घेराबंदी के बाद दो गुलदारों को मारा या पकड़ा गया, जिससे फिलहाल शांति है, लेकिन खंडहरों के रूप में मौजूद 'डेथ ट्रैप' अभी भी ग्रामीणों को डरा रहे हैं।

निवर्तमान प्रधान शम्भू प्रसाद उनियाल का कहना है कि ये दुकानें जिस तिराहे पर स्थित हैं, वहां से स्कूली बच्चों और राहगीरों का निरंतर आवागमन रहता है। दुकानों के आवंटियों की मृत्यु के बाद पिछले 30 वर्षों से इनका संचालन बंद है। वर्तमान में इन खंडहरों के भीतर और आसपास बड़ी-बड़ी झाड़ियाँ उग आई हैं, जहाँ कई बार रात के समय गुलदार को देखा गया है। प्रधान के अनुसार, इस संबंध में पूर्व में भी खंड विकास अधिकारी को सूचित किया गया था, लेकिन शासन-प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जनहित और सुरक्षा को देखते हुए इन जर्जर दुकानों को तुरंत हटाया जाए और इस संवेदनशील मार्ग पर स्ट्रीट लाइटों की व्यवस्था की जाए। यदि प्रशासन जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाता है, तो क्षेत्र में फिर से किसी अनहोनी की आशंका बनी रहेगी।

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