रामरतन सिंह पवांर/जखोली
विकासखंड जखोली के चौंरा गाँव मे किया गया पाडंव नृत्य का आयोजन
पाडंव नृत्य उतराखंड राज्य का एक प्रमुख लोकनृत्य माना जाता है। यह नृत्य महाभारत मे पांच पाडंवो के जीवन से समन्धित है। पाडंव नृत्य के बारे मे हर वो व्यक्ति जानता है,जिसने अपना जीवन उतराखंड की सुन्दर वादियो,रिति रीवाजो व अनेक परम्पराओं के बीच बिताया हो।
वैसे उतराखंड को पाडंवो की धरा भी कहा जाता है। मुख्य रूप से पाडंव नृत्य गाँव की खुशहाली के लिये किये जाते है ढोल और दमांऊ जो उतराखंड के पारम्परिक वाद्य यंत्र है, उनमे आलोकि शक्तियां निहित होती है, इन दो वाद्य यंत्रों द्वारा पाडंव नृत्य मे जो पाडंव बनते है उन्हे एक विशेष थाप द्वारा अवतरित किये जाते है , जिनको पाडंव पश्वा कहा जाता है वे गाँव वालो द्वारा तय किये जाते है । इसी प्रथा के चलते विकासखंड जखोली के ग्राम पंचायत चौरा मे पाडंव नृत्य का आयोजन शूरू हो गया शूरु हो गया हो है। यह पाडंव नृत्य लगभग पन्द्रह दिनो तक चलेगा।
चौरा के ग्राम प्रधान संजय नौटियाल ने बताया है का चौरा मे पाडंव नृत्य की परम्परा बर्षो से चली आ रही ।समस्त ग्रामीणों के सहयोग से गांव मे पाडंव नृत्य का आयोजन किया जाता है

