कृषि महाविद्यालय चिरबटिया में धूमधाम से मना 80वां स्वतंत्रता दिवस।
गढ़वाली में कुलपति के संबोधन पर जमकर बजीं तालियां।
कृषि महाविद्यालय चिरबटिया में शनिवार को 80वां स्वतंत्रता दिवस अत्यंत हर्षोल्लास और देशभक्ति के वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बी.पी. भट्ट ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। विशेष बात यह रही कि कुलपति ने अपना संबोधन गढ़वाली भाषा में दिया, जिससे अभिभूत होकर उपस्थित लोगों ने करतल ध्वनि (तालियों) से उनका आभार व्यक्त किया।
अपने संबोधन में डॉ. बी.पी. भट्ट ने कहा कि आज की स्वतंत्रता उन महान सेनानियों के त्याग और बलिदान का परिणाम है, जिन्होंने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने कहा, "हमें अपनी मेहनत से देश को आगे बढ़ाना है और हमारा कर्तव्य है कि जिस मातृभूमि ने हमें पहचान दी, हम उसके प्रति अपने दायित्वों को पूरी निष्ठा से निभाएं।" उन्होंने विद्यार्थियों से कृषि एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाने का आह्वान किया। साथ ही स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय क्षेत्र की उन्नति में तभी कारगर साबित होगा, जब इसमें स्थानीय जनसमुदाय की सक्रिय भागीदारी होगी।
डॉ0 बीपी भट्ट का गढ़वाली में सम्बोधन -
समारोह के दौरान ग्राम पंचायत लुठियाग के प्रधान प्रतिनिधि सैन सिंह मेहरा ने बताया कि ऊंचाई पर स्थित होने के कारण चिरबटिया क्षेत्र हमेशा पेयजल संकट से जूझता रहा है। अब सोलर पंप की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए उसे विद्युत संयोजन से जोड़ा जा रहा है, जिससे जल्द ही महाविद्यालय परिसर को पेयजल समस्या से स्थायी निजात मिलेगी।
कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता अनेन्द्र नैथानी ने कुलपति के गढ़वाली संबोधन की सराहना करते हुए कहा कि अपनी जन्मभूमि और मातृभाषा से जुड़ाव ही हमारी पहचान है। आज जहां लोग बच्चों को केवल हिंदी या अंग्रेजी सिखा रहे हैं, वहीं कुलपति डॉ. भट्ट से प्रेरणा लेकर नई पीढ़ी को अपनी बोली-भाषा और संस्कृति के संस्कार देना जरूरी है।
मंच का संचालन महाविद्यालय परिसर प्रभारी डॉ 0 अनीता रावत व जयदीप मेहरा द्वारा किया गया।
इस अवसर पर क्षेत्र पंचायत सदस्य (बुढना) राकेश लाल, पूर्व प्रधान रूप सिंह मेहरा, पूर्व प्रधान कुंवर सिंह कैंतूरा, जन विकास संस्थान के अध्यक्ष बैशाखी लाल, पूर्व सैनिक अमर सिंह मेहरा, महिला मंगल दल अध्यक्ष लुठियाग सहित मातृशक्ति व क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे।





