खलियान गांव के ग्रामीणों में आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी

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 आपदा के एक माह बाद भी सुध नहीं।

 खलियान गांव के ग्रामीणों में आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी।

जखोली (रुद्रप्रयाग): पश्चिमी बांगर के खलियान गांव में 10 जून को अतिवृष्टि के कारण मलबे और पानी की चपेट में आए खूड़गड़ गदेरे से मची तबाही के एक महीने बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रशासन और शासन की इस घोर उपेक्षा से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। गौरतलब है कि इस दैवीय आपदा में गांव के संपर्क मार्ग, पांच पैदल पुलिया, पंचायत भवन का आंगन व शौचालय सहित 9 गोशालाएं जमींदोज हो गई थीं, जिसमें दबकर 9 भैंसों की अकाल मौत हो गई थी। इसके अलावा ग्रामीणों की लगभग 80 नाली कृषि भूमि मलबे में तब्दील हो गई थी।


ग्राम प्रधान लक्ष्मी देवी ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि सिंचाई विभाग ने गांव के ऊपरी हिस्से में सिर्फ लस्तर-हिलाईं नहर के पिलर को सुरक्षित करने का काम किया है। गांव की सुरक्षा के लिए सुरक्षा दीवार और मलबे को हटाने का मुख्य कार्य अभी तक शुरू भी नहीं हो पाया है। ग्रामीणों ने इस गंभीर समस्या को जखोली मुख्यालय में आयोजित 'जन-जन की सरकार' कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्रियों के समक्ष भी उठाया था, लेकिन धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, क्षेत्र पंचायत सदस्य ललिता देवी ने कहा कि आपदा के तुरंत बाद क्षेत्रीय विधायक व कैबिनेट मंत्रियों ने पैदल मार्गों को सुचारू करने और मलबे के सुरक्षित निस्तारण का आश्वासन दिया था। वर्तमान में हो रही लगातार बारिश के कारण ग्रामीण फिर किसी अनहोनी की आशंका से खौफजदा हैं।

प्रशासनिक सुस्ती और वादों के अधूरा रहने से खलियान गांव के ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य सहित स्थानीय ग्रामीण रघुवीर सिंह राणा, रमेश सिंह बिष्ट, प्रकाश लाल, सुखवीर सिंह जाखी व रमेश चंद्र भट्ट ने सरकार को दो-टूक चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि जुलाई माह के भीतर क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों को ठीक करने और खूड़गड़ गदेरे पर सुरक्षा दीवार निर्माण का कार्य शुरू नहीं किया गया, तो समस्त ग्रामीण सामूहिक रूप से भूख हड़ताल और उग्र धरना-प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे।


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