डामरीकरण नहीं तो वोट नहीं।
बीरों देवल के ग्रामीणों ने दी 2027 विधानसभा चुनाव के बहिष्कार की चेतावनी।
बसुकेदार (रुद्रप्रयाग): "डामरीकरण नहीं, तो वोट नहीं" के नारों के साथ तहसील बसुकेदार के अंतर्गत आने वाले ग्राम बीरों देवल के ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गांव की अनुसूचित जाति बस्ती को जोड़ने वाले 2.5 किलोमीटर लिंक मोटर मार्ग पर वर्षों बाद भी डामरीकरण न होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने शासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र मार्ग की सुध नहीं ली गई, तो वे आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव का पूर्ण रूप से बहिष्कार करेंगे।
सड़क के इतिहास को लेकर ग्रामीणों का कहना है कि इस मोटर मार्ग का प्रारंभिक निर्माण वर्ष 2002 में हुआ था, जिसमें लगभग 500 मीटर हिस्से का निर्माण ग्रामीणों ने स्वयं श्रमदान करके किया था। इसके पश्चात, वर्ष 2016 में लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) ऊखीमठ ने इस मार्ग को अपने अधीन लेते हुए पंजीकृत किया। लोनिवि ने 2 किलोमीटर अतिरिक्त मोटर मार्ग का निर्माण कर इसे बांसवाड़ा-बष्टी मोटर मार्ग से जोड़ दिया। विभाग द्वारा प्रभावित ग्रामीणों को भूमि का मुआवजा भी आवंटित कर दिया गया था, लेकिन विडंबना यह है कि आज तक इस महत्वपूर्ण सड़क पर डामरीकरण का कार्य शुरू नहीं हो सका है।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या को लेकर उन्होंने कई बार जिलाधिकारी, damarikaran-nahi-toh-vote-nahi-biron-deval-villagers-warn-to-boycott-2027-elections विभाग और केदारनाथ विधानसभा के विधायक को ज्ञापन व प्रार्थना पत्र प्रेषित किए हैं, लेकिन कोई भी उनकी सुनने को राजी नहीं है।
लगातार हो रही इस अनदेखी से क्षुब्ध ग्राम प्रधान विजेश्वरी देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य अजय कुमार, दिनेश राणा, विक्की नेगी और विजेंद्र कुमार सहित तमाम ग्रामीणों ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि यथाशीघ्र इस मोटर मार्ग पर डामरीकरण नहीं हुआ, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में गांव में आने वाले सभी राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों का कड़ा विरोध किया जाएगा। चुनाव प्रचार के लिए क्षेत्र भ्रमण पर आने वाले नेताओं को काले झंडे दिखाए जाएंगे और उनके गांव में प्रवेश का पूर्ण रूप से विरोध कर चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा।


