रामरतन सिंह पंवार/जखोली
जखोली मे कृषि औद्योगिक एवं पर्यटन विकास मेले मे कपणिंया गांव की महिलाओं ने माधो सिंह भंडारी पर नाटक मंचन कर दिया अपनी कलाकारी का परिचय।
जखोली-गढवाल मे आज भी बीर भड़ शिरोमणि माधो सिंह भंडारी की वीरता को हमेशा स्मरण करते रहते है तथा उनकी वीरता की गाथाएं चारो और गढ़वाल के हर कोने-कोने तक फैला हुआ है।
गढ़वाल के इस महान योद्धा व शिल्पी को लोकगीतों व अन्य विधाओं में याद किया जाता है। इनकी वीरता के गीत उस हर पल का अहसास कराते हैं जिन्होंने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण प्रण से युद्ध लड़कर कृतिमान स्थापित किये।
वीर भड़ माधो सिंह के जीवन वृतांत को लेकर नाट्य मंचन भी किया जाता है। आपको बता दे कि विकासखंड जखोली मे कृषि औद्योगिक एवं पर्यटन विकास मेले के दौरान कलाकारों के द्वारा माधो सिंह भंडारी की वीरता को लेकर नाटक का मंचन किया गया इस नाटक मे मुख्यतया कपणिंया गांव की महिलाओं ने अपनी कलाकारी पेश की।
कौन थे वीर शिरोमणि माधो सिंह भंडारी
माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड मध्यकालीन इतिहास के वीर सपूतों एक थे, इनके शौर्य और पराक्रम के किसे आज भी कहे और सुनाये जाते है।
कहां हुआ था माधो सिंह भंडारी का जन्म-
माधो सिंह भंडारी का जन्म कृर्तिनगर के पास मलेथा गांव मे 1595 के आसपास सोणबाण कालो भंडारी के घर मे हुआ था।
माधो सिंह भंडारी भी अपने पिता सोणबाण भंडारी की तरह ही वीर थे, वीर शिरोमणि माधो सिंह भंडारी की इस वीरता को हमेशा कायम रखने हेतू बड़े बड़े किसान मेलो मे सांस्कृतिक कार्यक्रमों मे कलाकारों के द्वारा इनकी कृर्ति को जीवंत रखने के लिए माधो सिंह भंडारी द्वारा किए गए कार्यों का विशेष रुप से वर्णन किया जाता है ताकि हमारे गढ़वाल मे पैदा हुए वीर माधो सिंह भंडारी जैसे बीर बहादुरो को हमेशा याद किया जा सके।
अपनी ऐतिहासिक विरासत को याद करके हम उनके पद चिन्हों पर चल सकें जिससे कि समाज और संस्कार में मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना हर व्यक्ति में हो सके।

