उमेश कुमार के इस्तीफे के ऐलान से उत्तराखंड की सियासत गरमाई, कांग्रेस पर साधा निशाना।
गैरसैंण। उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र के पहले दिन खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार के विधायिकी से इस्तीफा देने के ऐलान ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी। खास बात यह रही कि उमेश कुमार ने अपने निशाने पर सत्तारूढ़ भाजपा के बजाय मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले साढ़े चार वर्षों में विपक्ष ने भ्रष्टाचार, महंगाई और जनसमस्याओं के मुद्दों पर उनका अपेक्षित साथ नहीं दिया।
गैरसैंण में मीडिया से बातचीत के दौरान उमेश कुमार ने कहा कि वह किसानों की समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठाते रहे, लेकिन हरिद्वार में फसलों की बर्बादी से प्रभावित किसानों के समर्थन में विपक्ष का कोई विधायक उनके साथ खड़ा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जब जनहित के मुद्दों पर अपेक्षित सहयोग ही नहीं मिल रहा, तो केवल पद पर बने रहने का औचित्य नहीं है।
उमेश कुमार ने भाजपा और कांग्रेस, दोनों में शामिल होने की संभावनाओं को खारिज करते हुए उत्तराखंड में तीसरा राजनीतिक विकल्प तैयार करने के संकेत दिए। उन्होंने भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ अपनी टीम के साथ आठ से दस विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की मंशा जताई। उनके इस ऐलान को 2027 के चुनाव से पहले नए राजनीतिक समीकरण बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
इधर, गैरसैंण में चल रहे विधानसभा सत्र के दौरान स्थायी राजधानी का सवाल भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले यह सत्र और सरकार का अंतिम बजट सत्र होने के कारण राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। अब निगाहें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार पर हैं कि वह गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की दिशा में कोई ठोस पहल करती है या नहीं। पहाड़ की जनता की वर्षों पुरानी मांग पर फैसला कब होगा, यह सवाल एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में है।

