क्या गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने का ऐलान करेगी भाजपा? 2027 चुनाव से पहले धामी सरकार के अंतिम बजट सत्र पर निगाहें।
भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र के दौरान उठेगा स्थायी राजधानी का सवाल? चुनाव से पहले सरकार के सामने पहाड़ की भावनाओं का जवाब देने की चुनौती, जनता पूछ रही है—गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के लिए आखिर कब तक करना होगा इंतजार?
गैरसैंण। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण एक बार फिर प्रदेश की सियासत के केंद्र में है। वर्ष 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले धामी सरकार के अंतिम बजट सत्र को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। ऐसे में चमोली जिले के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में होने वाले सत्र के दौरान गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ सकता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार आगामी विधानसभा चुनाव से पहले गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की दिशा में कोई बड़ा ऐलान करेगी या पहाड़ की जनता को अपनी इस मांग के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा?
उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान स्थायी राजधानी का सवाल जनभावनाओं से गहराई से जुड़ा रहा है। अलग राज्य की मांग के पीछे पहाड़ के विकास, स्थानीय लोगों को प्रशासनिक सुविधाओं की सुलभता, रोजगार के अवसरों में वृद्धि और क्षेत्रीय असंतुलन दूर करने जैसी अपेक्षाएं भी थीं। वर्ष 2020 में गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किए जाने के बाद लोगों को उम्मीद जगी थी कि आने वाले समय में इसे स्थायी राजधानी का दर्जा देने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, स्थायी राजधानी का प्रश्न अब भी अनिर्णीत है। ऐसे में विधानसभा सत्र के दौरान सरकार की ओर से इस विषय पर स्पष्ट रुख सामने आने की उम्मीद की जा रही है।
वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह सत्र भाजपा सरकार के लिए अपनी नीतियों, विकास कार्यों और भविष्य की योजनाओं को जनता के सामने रखने का महत्वपूर्ण अवसर होगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने जहां सरकार की उपलब्धियां गिनाने और विपक्ष के सवालों का जवाब देने की चुनौती रहेगी, वहीं विपक्ष बेरोजगारी, महंगाई, पलायन, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और पहाड़ी क्षेत्रों की बुनियादी समस्याओं को लेकर सरकार को घेर सकता है। गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग भी राजनीतिक बहस को धार दे सकती है।
यदि सरकार इस दिशा में कोई समयबद्ध कार्ययोजना, नीतिगत पहल या व्यापक विचार-विमर्श की घोषणा करती है, तो इसे पहाड़ की जनता के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा सकता है। हालांकि, गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने के संबंध में इस सत्र में किसी संभावित फैसले या घोषणा की आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग केवल राजधानी के स्थान तक सीमित नहीं है। इसके साथ पहाड़ की पहचान, प्रशासनिक पहुंच, स्थानीय रोजगार, आर्थिक गतिविधियों और पलायन रोकने की उम्मीदें भी जुड़ी हैं। जनता यह जानना चाहती है कि राज्य गठन के वर्षों बाद भी स्थायी राजधानी का सवाल कब तक राजनीतिक बहस का हिस्सा बना रहेगा।
अब निगाहें धामी सरकार के अंतिम बजट सत्र पर टिकी हैं। क्या भाजपा वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने का ऐलान कर जनता को बड़ा संदेश देगी, या यह मुद्दा एक बार फिर आश्वासनों और राजनीतिक चर्चाओं तक सीमित रह जाएगा? फिलहाल, गैरसैंण को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है—ग्रीष्मकालीन राजधानी से स्थायी राजधानी तक का सफर आखिर कब पूरा होगा?
गैरसैंण का सवाल
“ग्रीष्मकालीन राजधानी से आगे कब बढ़ेगा गैरसैंण?”
राज्य गठन के वर्षों बाद भी स्थायी राजधानी का सवाल कायम है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले धामी सरकार के सामने अवसर है कि वह गैरसैंण के भविष्य पर अपना रुख स्पष्ट करे। पहाड़ की जनता अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि स्पष्ट नीति, ठोस निर्णय और समयबद्ध कार्ययोजना की अपेक्षा कर रही है।

