खलियान वार्ड के जिला पंचायत सदस्य ग्यालू लाल की कांग्रेस में वापसी, बोले—‘सुबह का भूला शाम को घर आ जाए तो उसे भटका नहीं कहते’।
रुद्रप्रयाग। जनपद रुद्रप्रयाग के खलियान वार्ड से जिला पंचायत सदस्य ग्यालू लाल की एक बार फिर कांग्रेस में वापसी से क्षेत्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। भाजपा में शामिल होने के बाद अब कांग्रेस में लौटने के उनके फैसले को स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनकी वापसी के बाद क्षेत्र में उनके राजनीतिक रुख, पूर्व में दिए गए बयानों और आगामी दिनों में उनकी भूमिका को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
प्रेस को जानकारी देते हुए ग्यालू लाल ने अपनी वापसी पर कहा, “सुबह का भूला शाम को घर आ जाए तो उसे भटका नहीं कहते।” उन्होंने कहा कि वह जिला पंचायत सदस्य बनने के लिए भाजपा में शामिल हुए थे और चुनाव के बाद पुनः कांग्रेस में लौट आए हैं। भाजपा में शामिल होते समय कांग्रेस में करीब 35 वर्षों तक रहने के बावजूद उपेक्षा होने और सम्मान नहीं मिलने संबंधी उनके बयान पर भी सवाल उठे। इस पर उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि एक परिवार में लंबे समय तक रहने पर आपसी मनमुटाव हो जाते हैं, जिन्हें अब सुलझा लिया गया है।
गौरतलब है कि ग्यालू लाल ने लगभग 35 वर्षों तक कांग्रेस में रहने के बाद पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा था। उस समय उन्होंने कांग्रेस में उपेक्षा और सम्मान की कमी को पार्टी छोड़ने की वजह बताया था। अब कांग्रेस में उनकी वापसी के बाद उनके पहले के बयान और मौजूदा फैसले की तुलना करते हुए राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
वहीं, क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, जिला पंचायत चुनाव के दौरान ग्यालू लाल ने जिन विकास कार्यों और वादों को लेकर मतदाताओं से समर्थन मांगा था, उनकी प्रगति पर भी उनसे सवाल किए जा सकते हैं। खासकर उनके मूल गांव के बाहर अन्य गांवों में विकास कार्यों को लेकर उठ रही चर्चाओं के बीच जनता के बीच उनकी जवाबदेही महत्वपूर्ण होगी।
ग्यालू लाल की कांग्रेस में वापसी से उनकी राजनीतिक स्थिति और आगामी चुनावों में संभावनाओं पर क्या असर पड़ेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। हालांकि, पार्टी परिवर्तन और वापसी के इस घटनाक्रम ने खलियान वार्ड की राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है। आने वाले समय में क्षेत्र की जनता की प्रतिक्रिया, विकास कार्यों की स्थिति और स्थानीय राजनीतिक दलों की रणनीति उनकी आगे की राजनीतिक राह तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

