पश्चिमी बांगर में बारिश का कहर: लस्तर नदी का बदला रुख, धारकुड़ी, हिऊना और लिस्वाल्टा में भारी नुकसान।
लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण पश्चिमी बांगर क्षेत्र में तबाही का मंजर है। लस्तर नदी तट पर स्थित धारकुड़ी गांव में जलस्तर अचानक बढ़ने से नदी ने रुख बदल लिया और तेज कटाव शुरू कर दिया। इससे ग्रामीणों की उपजाऊ कृषि भूमि नदी में समा गई। इसके साथ ही गांव की गौशाला और ग्रामीण कमल सिंह के मत्स्य पालन तालाबों में भारी मलबा व गाद भरने से मछलियों को बड़ा नुकसान पहुंचा है। ग्राम प्रधान स्नेहा पंवार ने बताया कि पूर्व में भी ऐसी आपदा आई थी, लेकिन प्रशासन द्वारा सुरक्षा दीवार न बनाए जाने से फिर यह नुकसान हुआ है। सूचना पर पहुंचे राजस्व उप निरीक्षक नरेंद्र सिंह ने क्षति का आकलन शुरू कर दिया है।
दूसरी ओर, ग्राम पंचायत पौंठी सिलगढ़ के हिऊना तोक में गांव के ऊपर से आए भारी मलबे ने 10 परिवारों के आंगनों को पाट दिया, जबकि रमेश प्रसाद थपलियाल की रसोई बह गई। इस घटना से कई मकानों पर खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार ऐसा खौफनाक मंजर पहले कभी नहीं देखा गया। ग्राम प्रधान रमेश सिंह कंडारी ने प्रशासन से तत्काल मलबा हटाने, पैदल मार्ग को दुरुस्त करने और सुरक्षा दीवार निर्माण की मांग की है। मौके पर मौजूद कानूनगो दुर्गा सिंह रावत ने नुकसान का जायजा लेने की बात कही है।
वहीं, लिस्वाल्टा गांव में बीते सप्ताह से सक्रिय भूस्खलन के कारण तीन परिवारों की सांसें अटकी हुई हैं। ग्राम प्रधान परिबंदा देवी ने बताया कि बिपिन सिंह व भगवान सिंह के मकान तथा आशा देवी की गौशाला कभी भी इस भूस्खलन की जद में आ सकते हैं। आपदा प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द राहत व सुरक्षा उपाय लागू करने की गुहार लगाई है।















