रुद्रप्रयाग के डॉ. कृष्णानन्द डिमरी को नई दिल्ली में 'मानद डॉक्टरेट उपाधिG

कृष्णानन्द डिमरी को सामाजिक सेवा, जनचेतना और शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित 'मानद डॉक्टरेट उपाधि',
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रुद्रप्रयाग के डॉ. कृष्णानन्द डिमरी को नई दिल्ली में 'मानद डॉक्टरेट उपाधि' से नवाजा गया, क्षेत्र में खुशी की लहर।

नई दिल्ली/रुद्रप्रयाग। देवभूमि उत्तराखण्ड के रुद्रप्रयाग जनपद अंतर्गत स्वीली गाँव के मूल निवासी और प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता कृष्णानन्द डिमरी को सामाजिक सेवा, जनचेतना और शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित 'मानद डॉक्टरेट उपाधि' (Honorary Doctorate Award) से सम्मानित किया गया है। नई दिल्ली में 'आइकॉनिक पीस अवार्ड काउंसिल' (IPAC) द्वारा आयोजित एक भव्य समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। डॉ. डिमरी को यह उपाधि मिलने से उनके गृह जनपद सहित संपूर्ण उत्तराखण्ड में हर्ष की लहर है।

डॉ. कृष्णानन्द डिमरी का जीवन ग्रामीण उत्थान और जमीनी स्तर पर जनसमस्याओं के समाधान के लिए समर्पित रहा है। "विकास केवल भौतिक साधनों से नहीं, बल्कि जागरूक विचारों से होता है" के मूलमंत्र को जीने वाले डॉ. डिमरी ने हमेशा सामूहिक सहभागिता और सामाजिक जागरूकता पर विशेष बल दिया है। उन्होंने न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और जनअधिकारों के लिए संघर्ष किया, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए भी निरंतर जनचेतना अभियान चलाए।

उनका एक सबसे महत्वपूर्ण और सराहनीय पक्ष युवाओं व विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करना रहा है। संसाधनों के अभाव से जूझने वाले ग्रामीण परिवेश के छात्रों के लिए वे लंबे समय से एक मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानने और शिक्षा के माध्यम से जीवन में उच्च आदर्श स्थापित करने के लिए युवाओं को सदैव प्रेरित किया है।

वैश्विक पटल पर मिली इस पहचान और डॉक्टरेट की उपाधि को डॉ. डिमरी अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि से अधिक समाज के प्रति एक नई जिम्मेदारी मानते हैं। उनका मानना है कि यह सम्मान उस विचारधारा का है जो समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान को सर्वोपरि रखती है। दृढ़ संकल्प और निष्ठा का जीवंत प्रतीक बन चुके डॉ. कृष्णानन्द डिमरी को मिला यह अंतर्राष्ट्रीय सम्मान यह साबित करता है कि सच्चे सेवाभाव से किया गया कार्य स्थानीय सीमाओं को पार कर वैश्विक पहचान हासिल करता है। यह उपाधि उनके अब तक के सामाजिक कार्यों का प्रतिफल होने के साथ ही भविष्य के बड़े संकल्पों की एक नई शुरुआत है।


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