करोड़ों की लागत से बनी ऐतिहासिक लस्तर नहर बदहाली का शिकार

Rudraprayag) जखोली लस्तर नहर बदहाली,पोंणगाड गदेरे अतिवृष्टि नुकसान,
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 सिंचाई विभाग की घोर लापरवाही: सिंचाई के पानी हेतु आसमान ताकने को मजबूर किसान।

करोड़ों की लागत से बनी ऐतिहासिक लस्तर नहर बदहाली का शिकार, ग्रामीणों में भारी रोष।

रुद्रप्रयाग। जनपद के विकासखंड जखोली के अंतर्गत आने वाली ऐतिहासिक लस्तर हिलाईं नहर आज विभागीय उपेक्षा और राजनीति की भेंट चढ़कर खंडहर में तब्दील हो चुकी है। गत 26 जून 2025 को पोंणगाड गदेरे में आई भीषण अतिवृष्टि के कारण मोटरवाहन पुल के साथ-साथ यह नहर भी बह गई थी। इसी गदेरे पर कोठियाड़ा और पोंणजोली गांवों का मुख्य पेयजल स्रोत भी स्थित है, जो 250 से अधिक परिवारों की प्यास बुझाता है। आपदा से पूर्व इस स्थान पर जल निकासी की व्यवस्था थी, लेकिन वर्तमान में सिंचाई विभाग रुद्रप्रयाग द्वारा बिना किसी जल निकासी के ही दोबारा नहर का निर्माण करवा दिया गया है, जिससे भविष्य में फिर बड़े नुकसान का खतरा मंडरा रहा है। इस संबंध में जब सिंचाई विभाग से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो विभाग की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।

जनप्रतिनिधियों और स्थानीय काश्तकारों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पूर्व प्रधान मयाली हरीश सिंह, क्षेत्र पंचायत सदस्य शम्भू प्रसाद, प्रदीप भट्ट, सत्ये सिंह राणा और प्रधान कोठियाड़ा पवन सिंह ने संयुक्त रूप से आक्रोश जताते हुए कहा कि जब इस नहर में सिंचाई का पानी चलना ही नहीं है, तो जनता के टैक्स के पैसे का इस कदर दुरुपयोग क्यों किया जा रहा है? उन्होंने मांग की है कि या तो इस नहर को पूरी तरह बंद कर दिया जाए, या फिर धरातल पर गुणवत्तापूर्ण कार्य करवाकर इसे सुचारू किया जाए।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 1977-78 में तत्कालीन विधायक कॉमरेड विद्यासागर नौटियाल के प्रयासों से पट्टी बांगर से लस्या पट्टी के बजीरा तक 29 किलोमीटर लंबी इस नहर का निर्माण कराया गया था, ताकि जखोली के 40 से अधिक गांवों के काश्तकारों को सिंचाई की सुविधा मिल सके। वर्ष 2012-13 में इसका 1.8 किलोमीटर और विस्तार किया गया, जिससे इसकी कुल लंबाई 30.8 किलोमीटर हो गई और इसे एशिया की सबसे ऊंचाई पर स्थित सबसे लंबी नहरों में शुमार होने का गौरव प्राप्त हुआ।

विडंबना यह है कि आज यह ऐतिहासिक धरोहर पूरी तरह वीरान पड़ी है और इसमें दो-दो मीटर लंबी घास उग आई है। करोड़ों रुपए की लागत से बनी इस नहर की सुध लेने में जिला प्रशासन ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। ग्रामीणों का कहना है कि मरम्मत के नाम पर लाखों का बजट डकारने वाले नेता आज भूमिगत हैं, जबकि जनता आज भी खेतों तक पानी पहुंचने का इंतजार कर रही है।




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