रुद्रप्रयाग में पिरूल एकत्रीकरण अभियान शुरू।
जंगलों को आग से बचाने के साथ महिलाओं को मिलेगा रोजगार।
जनपद में वनाग्नि की रोकथाम और ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से पिरूल (चीड़ की पत्तियां) एकत्रीकरण एवं मूल्य संवर्धन अभियान का विधिवत शुभारंभ हो गया है। विकासखंड जखोली की ग्राम पंचायत दरमोला में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) रजत सुमन और मुख्य विकास अधिकारी (CDO) राजेंद्र सिंह रावत ने रुद्रनाथ स्वायत्त सहकारिता समूह की महिलाओं द्वारा एकत्रित किए गए पिरूल से भरे वाहन को प्रसंस्करण के लिए सोनप्रयाग रवाना किया।
मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देशन में महिलाओं के लिए एक आकर्षक प्रोत्साहन मॉडल लागू किया गया है। इसके तहत जंगलों से पिरूल इकट्ठा करने वाली महिलाओं को 12 रुपये प्रति किलो की दर से सीधा उनके बैंक खातों में (DBT के माध्यम से) भुगतान किया जा रहा है। इससे न केवल वनाग्नि की घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को घर के पास ही अतिरिक्त आय का जरिया भी मिलेगा।
प्रभागीय वनाधिकारी रजत सुमन के अनुसार, एकत्रित पिरूल का उपयोग सोनप्रयाग स्थित 'हाई-फीड' (HI-Feed) प्लांट में ईंधन और औद्योगिक कार्यों के लिए किया जाएगा। पूरी एकत्रीकरण और भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए इसकी डिजिटल निगरानी 'डीपीएमयू' (DPMU) द्वारा की जा रही है। वन विभाग ने आगामी माह में 1,000 कुंतल पिरूल एकत्र करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
जिला विकास अधिकारी अनीता पंवार ने बताया कि वर्तमान में जनपद के दरमोला, तैला, नागराजा सौड़, दौला और कौशलपुर क्षेत्रों में यह अभियान तेजी से चल रहा है। इसमें 13 आजीविका संघों से जुड़ीं 114 महिलाएं सक्रिय हैं, जो अब तक 434 कुंतल पिरूल एकत्र कर चुकी हैं। स्थानीय महिला समूहों ने इस जनहितैषी पहल के लिए सरकार और प्रशासन का आभार जताया है।


