रामरतन सिंह पंवार
जखोली के दूरस्थ गाँवों में दम तोड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था, उक्रांद ने सीएमओ को सौंपा ज्ञापन।
जिस भवन को ग्रामीणों का इलाज करना था, वह खुद ही अपनी बदहाली के आंसू रो रहा है। सरकार के विकास के दावे इन सीमांत गाँवों में आकर दम तोड़ देते हैं।
भ्रमण के बाद सामने आई हकीकत; खुद 'बीमार' नजर आ रहा प्राथमिक चिकित्सा भवन।
26 जून की आपदा के जख्म अब भी हरे, स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर केवल आश्वासन।
रुद्रप्रयाग। जनपद के जखोली ब्लॉक के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी जन-सुविधाओं की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। कल क्षेत्र के खोड़ बकसीर, डांगी, भुनाल और मथ्या गाँव का स्थलीय भ्रमण करने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली का एक दर्दनाक सच सामने आया। यहाँ का प्राथमिक चिकित्सा भवन इस कदर जर्जर हो चुका है कि उसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो भवन स्वयं किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित होकर वेंटिलेटर पर हो।
इस गंभीर जन समस्या को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) ने मोर्चा खोल दिया है। उक्रांद के केंद्रीय महामंत्री अर्जुन कण्डारी (यु.प्र.), सूरत सिंह झिंक्वान, जिला महामंत्री अजीत सिंह और जिला प्रचार मंत्री प्रदीप बिष्ट ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) से मुलाकात कर एक तीखा ज्ञापन सौंपा। नेताओं ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए तत्काल सुधार की मांग की।
"जिस भवन को ग्रामीणों का इलाज करना था, वह खुद ही अपनी बदहाली के आंसू रो रहा है। सरकार के विकास के दावे इन सीमांत गाँवों में आकर दम तोड़ देते हैं।" — अर्जुन कण्डारी, केंद्रीय महामंत्री (उक्रांद)
नेताओं ने सीएमओ रुद्रप्रयाग को याद दिलाया कि 26 जून की भीषण आपदा के बाद इन छह गाँवों का मुख्य व्यापारिक केंद्र 'छेनागाड बाजार' पूरी तरह तबाह हो गया था। उस संकटकाल में दैनिक जरूरत की सामग्री को पश्चिमी बांगर से घोड़ों के जरिए जैसे-तैसे गाँवों तक पहुँचाया गया था। सबसे बदतर स्थिति मरीजों की थी, जिन्हें आपातकालीन स्थिति में केवल सरकारी हेलीकॉप्टर सेवाओं के भरोसे छोड़ दिया गया था।
इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी इन दूरस्थ गाँवों में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं का न सुधरना सीधे तौर पर प्रशासनिक उदासीनता और सरकारी दावों की पोल खोलता है। स्थानीय जनता ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द अस्पताल भवन की मरम्मत नहीं की गई और पर्याप्त डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।


