पीडब्ल्यूडी की लापरवाही: मयाली बाजार बना 'नदी'

मयाली बाजार में समस्याओं का अम्बार,
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पीडब्ल्यूडी की लापरवाही: मयाली बाजार बना 'नदी', दुकानों में घुस रहा पानी, व्यापारियों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

अतिक्रमण और सरकारी उदासीनता की दोहरी मार, मयाली-तीलवाड़ा मोटर मार्ग के किनारे पिछले मानसून का मलबा तक नहीं हटाया गया है। 

मयाली (रुद्रप्रयाग): जनपद के मयाली मुख्य बाजार में लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली के प्रति स्थानीय व्यापारियों और निवासियों का आक्रोश चरम पर है। उचित जल निकासी की व्यवस्था न होने के कारण हल्की बारिश में भी बाजार की सड़कें नदी का रूप ले रही हैं। पिछले चार दिनों से जारी मूसलाधार बारिश ने स्थिति को भयावह बना दिया है, जिससे न केवल व्यापार ठप है, बल्कि आम जनजीवन भी अस्त-व्यस्त हो गया है।

बाजार की भौगोलिक स्थिति ढलानदार होने के कारण ऊपरी बाजार की नालियों का सारा गंदा पानी और कचरा निचले बाजार की दुकानों में समा रहा है। व्यापारियों का कहना है कि मयाली बाजार से जखोली मुख्यालय जाने वाले मार्ग पर राजकीय बालिका इंटर कॉलेज से लेकर मयाली गदेरे तक, लगभग 1 किलोमीटर के दायरे में पुराने स्क्रबर अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुके हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि नालियां चोक होने से पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे मयाली पार्किंग के अस्तित्व पर भी खतरा मंडराने लगा है।

हैरानी की बात यह है कि मयाली-तीलवाड़ा मोटर मार्ग के किनारे पिछले मानसून का मलबा तक नहीं हटाया गया है। नालियों के अभाव में गदेरे का उफनता पानी सीधे दुकानों के भीतर घुस रहा है, जिससे व्यापारियों का लाखों का कीमती सामान बर्बाद हो चुका है और क्षेत्र में संक्रामक बीमारियों का भय बना हुआ है।

व्यापारियों का आरोप है कि विभाग के जिम्मेदार अधिकारी केवल खोखले आश्वासन दे रहे हैं। वासुदेव टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष हरीश पुण्डीर और पूर्व व्यापार संघ अध्यक्ष सुरेन्द्र सकलानी ने बताया कि दो दिन पूर्व लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता इंद्रजीत बोस ने मौके पर जेसीबी भेजने का वादा किया था, लेकिन 48 घंटे बीत जाने के बाद भी धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। विभाग की इस सुस्ती ने व्यापारियों के धैर्य का बांध तोड़ दिया है।

व्यापारियों ने विभाग को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अविलंब नाली निर्माण और मलबे की सफाई नहीं कराई गई, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे। व्यापारियों का कहना है कि विभाग की लापरवाही का खामियाजा वे अब और नहीं भुगतेंगे। शासन-प्रशासन से मांग की गई है कि संवेदनशील स्थिति को देखते हुए तुरंत प्रभावी कदम उठाए जाएं ताकि बाजार को जलमग्न होने से बचाया जा सके।

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