जखोली के धनकुराली में आलू, मटर और कीवी की फसलें तबाह

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प्रकृति का कहर: भारी ओलावृष्टि से किसानों की उम्मीदों पर फिरा पानी, आलू और कीवी की फसलें बर्बाद

नकदी फसलों का गढ़ धनकुराली हुआ प्रभावित, काश्तकारों का छलका दर्द, आर्थिक संकट की आहट 

जखोली (रुद्रप्रयाग): पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम के बदले मिजाज ने काश्तकारों की कमर तोड़कर रख दी है। विकासखंड जखोली के अंतर्गत आने वाले ग्राम धनकुराली और आसपास के इलाकों में पिछले एक सप्ताह से जारी खराब मौसम और सायंकाल के समय होने वाली तेज बारिश व ओलावृष्टि ने नकदी फसलों को भारी नुकसान पहुँचाया है। इस प्राकृतिक आपदा से क्षेत्र के फल एवं सब्जी उत्पादक किसान गहरे संकट में नजर आ रहे हैं।

ग्राम प्रधान धनकुराली, नरेंद्र सिंह ने क्षेत्र की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि धनकुराली गाँव अपनी उन्नत कीवी और सब्जी उत्पादन के लिए विशिष्ट पहचान रखता है। गाँव का लगभग हर परिवार आलू, मटर और कीवी जैसी नकदी फसलों की खेती से अपनी आजीविका चलाता है। उन्होंने कहा, "आज हुई भीषण ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी आलू और मटर की फसल को पूरी तरह बिछा दिया है। साथ ही कीवी, सेब और माल्टा के पेड़ों पर आए फूल और फल भी ओलों की मार से नष्ट हो गए हैं।"

फसल की बर्बादी देख किसानों के चेहरे पर मायूसी छाई हुई है। क्षेत्र के प्रगतिशील काश्तकार नरेंद्र कुंवर सिंह, रघुवीर सिंह, करण सिंह और पूरण सिंह ने बताया कि उन्होंने इस सीजन की फसल के लिए काफी मेहनत और निवेश किया था, लेकिन लगातार हो रही बारिश और ओलावृष्टि ने सब कुछ तबाह कर दिया है।

"इस बार की ओलावृष्टि इतनी भीषण थी कि पौधों में कुछ शेष नहीं बचा है। हम इस बार की नकदी फसल से पूरी तरह हाथ धो बैठे हैं। हमारी साल भर की कमाई और मेहनत मिट्टी में मिल गई है।" — कुंदन सिंह, प्रेम सिंह, मोहित सिंह एवं विजय सिंह (स्थानीय काश्तकार)

लगातार खराब मौसम के कारण किसानों को न केवल वर्तमान फसल का नुकसान हुआ है, बल्कि आगामी सीजन के लिए भी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल मौका-मुआयना कर नुकसान का आकलन किया जाए और पीड़ित किसानों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए, ताकि उन्हें इस बड़े आर्थिक झटके से उबारा जा सके।

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