वनाग्नि के दोषियों पर बरतेगा 'जीरो टॉलरेंस', पिरूल संग्रहण और संचार तंत्र होगा मजबूत: मुख्य वन संरक्षक।
इको-टूरिज्म स्थलों पर पर्यटकों की सुरक्षा, सुविधाओं के विस्तार और कचरा प्रबंधन के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने पर जोर।
रुद्रप्रयाग। मुख्य वन संरक्षक (गढ़वाल) डॉ. धीरज पाण्डे ने रुद्रप्रयाग वन प्रभाग का दौरा कर वनाग्नि सुरक्षा और वन प्रबंधन की तैयारियों का सघन निरीक्षण किया। जंगलों को आग से सुरक्षित रखने के लिए विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा करते हुए उन्होंने अधिकारियों को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए। डॉ. पाण्डे ने वनाग्नि रोकथाम हेतु स्थापित क्रू-स्टेशनों का निरीक्षण किया और उनकी कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी व त्वरित बनाने पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जंगलों में आग लगाने वाले अराजक तत्वों के विरुद्ध विभाग 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान मुख्य वन संरक्षक ने वनाग्नि प्रबंधन के लिए संचार व्यवस्था को सुव्यवस्थित (स्ट्रीमलाइन्ड) करने के निर्देश दिए, ताकि सूचनाओं का आदान-प्रदान तेजी से हो सके। उन्होंने वनाग्नि की घटनाओं को कम करने के लिए पिरूल (चीड़ की सूखी पत्तियां) संग्रहण अभियान को व्यापक स्तर पर चलाने और इसे और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। साथ ही, सभी वनक्षेत्राधिकारियों को ग्राम स्तर पर जन-जागरूकता कार्यक्रमों को तेज करने को कहा गया ताकि स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
वन प्रबंधन के साथ-साथ जनपद में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और केदारनाथ व रुद्रप्रयाग के प्रभागीय वनाधिकारी शामिल हुए। बैठक में विश्व प्रसिद्ध तुंगनाथ एवं चंद्रशिला ट्रेक के प्रबंधन और सुधार पर विस्तृत चर्चा की गई। डॉ. पाण्डे ने इको-टूरिज्म स्थलों पर पर्यटकों की सुरक्षा, सुविधाओं के विस्तार और कचरा प्रबंधन के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन गतिविधियों में स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाकर न केवल वनों का संरक्षण होगा, बल्कि स्वरोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।


