सुमाड़ी-तिलवाड़ा में गूंजा 'विराट हिंदू सम्मेलन': सनातन संस्कारों और सामाजिक एकता से सुदृढ़ होगा भविष्य।
तिलवाड़ा (रुद्रप्रयाग)। जनपद के सुमाड़ी-तिलवाड़ा बस अड्डे पर रविवार को आयोजित “विराट हिंदू सम्मेलन” केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के गौरवशाली अतीत को पुनर्जीवित करने और समाज में नई चेतना फूंकने वाला एक आध्यात्मिक महाकुंभ सिद्ध हुआ। इस सम्मेलन ने स्पष्ट संदेश दिया कि समाज की मजबूती उसकी जड़ों और समृद्ध इतिहास से जुड़ने में ही निहित है
कार्यक्रम का शुभारंभ भावी पीढ़ी (बच्चों) की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुआ, जिसने यह दर्शाया कि संस्कार का बीज बचपन से ही रोपा जा रहा है। तत्पश्चात, कीर्तन मंडलियों के भजनों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। सम्मेलन में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि हिंदू समाज का इतिहास त्याग, तपस्या और विश्व कल्याण का रहा है। अपने इसी समृद्ध अतीत को याद कर आज के युवाओं को राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका तय करनी होगी।
मुख्य वक्ता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख श्री संजय जी ने अपने संबोधन में कहा कि सनातन संस्कृति ही समाज को जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है। उन्होंने सामाजिक समरसता पर विशेष बल देते हुए कहा कि जब तक समाज भेदभाव मुक्त होकर एकजुट नहीं होगा, तब तक राष्ट्र परम वैभव को प्राप्त नहीं कर सकता। वहीं, कोटेश्वर धाम के महंत शिवानंद गिरि ने धर्म और संस्कारों को व्यक्तिगत जीवन में उतारने का आह्वान किया, ताकि एक सभ्य और संस्कारवान समाज की नींव रखी जा सके।
"यह सम्मेलन धार्मिक जागरण के साथ-साथ सामाजिक एकता की दिशा में एक मील का पत्थर है, जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी विरासत पर गर्व करना सिखाएगा"।
उम्मेद सिंह बर्तवाल के कुशल मंच संचालन में संपन्न हुए इस कार्यक्रम में अरुण चमोली, आशीष कंडारी, सचिन, रोशन झा, विक्रम सिंह कंडारी, वाचस्पति सेमवाल सहित भारी संख्या में मातृशक्ति और ग्रामीण उपस्थित रहे।


