आस्था का सैलाब: एक माह के भ्रमण के बाद अगस्त्यमुनि मैदान की ओर बढ़ी मुनि महाराज की डोली।
अगस्त्यमुनि/रुद्रप्रयाग। पहाड़ की चोटियों से लेकर घाटियों तक इन दिनों भक्ति और अटूट श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। रुद्रप्रयाग जनपद की समृद्ध देव परंपरा का निर्वहन करते हुए, मुनि महाराज जी की पावन डोली एक माह के व्यापक क्षेत्र भ्रमण के बाद अब अपने गंतव्य, अगस्त्यमुनि मैदान की ओर प्रस्थान कर रही है। आज डोली के गंगतल से सिल्ली की ओर रवाना होते ही श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर दिखाई दिया। आगामी 14 फरवरी को डोली का अगस्त्यमुनि मैदान में भव्य आगमन प्रस्तावित है, जिसे लेकर पूरे क्षेत्र में दीपावली जैसा उल्लास है।
उत्तराखंड की संस्कृति में ईष्ट देव केवल पूज्य नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की भांति लोक जीवन का हिस्सा हैं। पिछले एक महीने से मुनि महाराज की डोली गाँव-गाँव, देहरी-देहरी जाकर अपने भक्तों को आशीष दे रही थी। ढोल-दमाऊं की गूँज और पारंपरिक जागिरों के बीच जब देव डोली किसी गाँव की सीमा में प्रवेश करती है, तो पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है। यह यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पहाड़ की उस 'दिवारा' परंपरा का जीवंत स्वरूप है, जो सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे को सुदृढ़ करती है।
समिति के पदाधिकारियों और स्थानीय ग्रामीणों का मानना है कि यह यात्रा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और लोक विरासत से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। अगस्त्यमुनि मैदान में डोली के स्वागत को ऐतिहासिक बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। इस पुण्य अवसर पर धर्मेंद्र रावत, सुनील नेगी, संजय नेगी, जगत सिंह रावत, मनवर रावत और दलीप सिंह रावत समेत बड़ी संख्या में ध्याणियां (बेटियां) और ग्रामीण इस पावन यात्रा के साक्षी बन रहे हैं।
श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास और डोली के साथ चलते हजारों कदम इस बात का प्रमाण हैं कि आधुनिकता के दौर में भी पहाड़ की लोक परंपराएं और ईष्ट के प्रति अगाध श्रद्धा अडिग है।


