पिंजरे खाली, हमले जारी; 25 पिंजरों में एक माह बाद भी नहीं फंसा कोई तेंदुआ। तकनीक और पिंजरे साबित हो रहे नाकाम।
अल्मोड़ा। जनपद में आदमखोर होते तेंदुओं की दहशत कम होने का नाम नहीं ले रही है। ताज्जुब की बात यह है कि वन विभाग द्वारा जिले भर में लगाए गए 25 पिंजरों में एक महीना बीत जाने के बाद भी एक भी तेंदुआ कैद नहीं हो सका है। जहां एक ओर विभाग पिंजरों और तकनीक के जरिए बचाव का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों में मवेशियों पर हमले बदस्तूर जारी हैं, जिससे जनता में भारी आक्रोश और भय का माहौल है।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, आबादी वाले क्षेत्रों से तेंदुओं को दूर रखने के लिए जिले के विभिन्न संवेदनशील इलाकों में 50 ट्रैप कैमरे, 10 फॉक्स लाइट और 10 एनाइडर लगाए गए हैं। मल्ला जोशी खोला सहित 25 चिन्हित स्थानों पर पिंजरे सक्रिय हैं। हालांकि, इन तमाम प्रयासों के बावजूद विभाग को अब तक सफलता नहीं मिली है। अल्मोड़ा के प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) दीपक सिंह का कहना है कि वन्यजीवों के हमलों को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है और सूचना मिलने पर टीम तुरंत मौके पर भेजी जा रही है।
तेंदुए की सक्रियता का ताजा मामला तहसील चौखुटिया के सिमलखेत-घुरसाली ग्राम पंचायत से सामने आया है। यहां तेंदुए ने बिसन राम के बछड़े को अपना निवाला बना लिया। इस घटना के बाद से गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग शाम ढलते ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है; इससे पहले भी कई मवेशी तेंदुए का शिकार बन चुके हैं।
घटना से आक्रोशित पूर्व प्रधान हीरा नेगी और दिनेश परसारा सहित अन्य ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रभावित क्षेत्र में तत्काल गश्त बढ़ाई जाए, नए सिरे से पिंजरे लगाए जाएं और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही तेंदुए के आतंक से निजात नहीं मिली, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।


