उत्तराखंड-यूपी STF का बड़ा एक्शन: SSC परीक्षा में सेंधमारी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, देहरादून से दो गिरफ्तार।
देहरादून: उत्तराखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों और पुलिस महानिदेशक (DGP) दीपम सेठ की कार्ययोजना का असर दिखने लगा है। उत्तराखंड एसटीएफ और उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने एक संयुक्त ऑपरेशन में बड़ी सफलता हासिल करते हुए SSC (कर्मचारी चयन आयोग) मल्टी टॉस्किंग भर्ती परीक्षा-2025 में नकल कराने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। टीम ने देहरादून के एक परीक्षा केंद्र से दो मुख्य अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है, जो अत्याधुनिक तकनीक के जरिए अभ्यर्थियों के पेपर हल करवा रहे थे।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसटीएफ) नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि देहरादून के एमकेपी इंटर कॉलेज स्थित 'महादेव डिजिटल जोन' परीक्षा केंद्र पर संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली थी। एसटीएफ टीम ने जब वहां छापा मारा, तो यूपीएस रूम के एक कोने में 24×24 इंच का एक भूमिगत गुप्त चैम्बर (गड्ढा) मिला। इस चैम्बर के भीतर दो लैपटॉप और राउटर स्वचालित अवस्था में पाए गए। जांच में सामने आया कि इन लैपटॉप्स के जरिए परीक्षा हॉल के सिस्टम को रिमोट एक्सेस पर लेकर पेपर हल किए जा रहे थे। एसटीएफ ने तकनीकी और फॉरेंसिक उपकरणों की मदद से इन उपकरणों को कब्जे में लेकर सील कर दिया है।
गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों की पहचान नीतिश कुमार (निवासी देवरिया, यूपी हाल निवासी दिल्ली) और भास्कर नैथानी (निवासी नथुवावाला, देहरादून) के रूप में हुई है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह गिरोह अभ्यर्थियों से परीक्षा पास कराने के नाम पर 10 लाख रुपये की मोटी रकम वसूलता था। गिरोह रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर अभ्यर्थी के कंप्यूटर को अपने नियंत्रण में ले लेता था और बाहर से ही प्रश्नों को हल कर देता था। इस मामले में पुलिस ने कोतवाली देहरादून में 'उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम 2023', बीएनएस (BNS) और आईटी एक्ट की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
इस पूरी कार्यवाही का नेतृत्व आईजी एसटीएफ डॉ. नीलेश आनंद भरणे के निर्देशों पर एसएसपी एसटीएफ नवनीत सिंह भुल्लर और डीएसपी आरबी चमोला ने किया। टीम में उत्तराखंड एसटीएफ के निरीक्षक नंदकिशोर भट्ट, उपनिरीक्षक राजेश ध्यानी और उत्तर प्रदेश एसटीएफ के उपनिरीक्षक जयवीर सिंह सहित कई जवान शामिल रहे। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी विवेचना अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) रैंक के अधिकारी को सौंपी गई है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।


