नंदा राजजात 2026 स्थगित: इस वर्ष नहीं होगी हिमालयी महाकुंभ की कठिन डगर, श्रद्धालुओं का बढ़ा इंतजार।
चमोली/कर्णप्रयाग: उत्तराखंड की लोक संस्कृति की धुरी और पहाड़ की आराध्य माँ नंदा देवी की सबसे बड़ी पैदल यात्रा 'नंदा राजजात' को लेकर एक बड़ा निर्णय लिया गया है। इस वर्ष अगस्त-सितंबर में प्रस्तावित हिमालयी महाकुंभ श्रीनंदा देवी राजजात 2026 को आधिकारिक रूप से स्थगित कर दिया गया है। रविवार को कर्णप्रयाग में आयोजित राजजात समिति की कोर कमेटी की बैठक में यह फैसला लिया गया, जिससे अब श्रद्धालुओं को अपनी 'पहाड़ की ध्याणी' (मायके आने वाली बेटी) की विदाई के लिए और इंतजार करना होगा।
समिति के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुंवर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कई तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की गई। निर्णय का मुख्य आधार मलमास का होना है, जिसके चलते होमकुंड में पूजा की तिथि 20 सितंबर तक खिंच रही थी। सितंबर के अंतिम सप्ताह तक बुग्याली क्षेत्रों (उच्च हिमालयी घास के मैदान) में मौसम अत्यंत प्रतिकूल हो जाता है और बर्फबारी की प्रबल संभावना रहती है। ऐसे में 280 किलोमीटर की इस दुर्गम पैदल यात्रा में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर जोखिम बढ़ सकता था। इसके अतिरिक्त, यात्रा मार्ग के पड़ावों पर ढांचागत सुविधाओं का अभाव और प्रशासन की ओर से प्राप्त पुनर्विचार पत्र भी इस स्थगन के प्रमुख कारण रहे।
पहाड़ के निवासियों के लिए नंदा राजजात केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह उनके जीवन, संवेदनाओं और अटूट आस्था का प्रतीक है। माँ नंदा उत्तराखंड के लोगों के लिए घर की बेटी के समान हैं। जब नंदा की राजजात निकलती है, तो हर गांव और हर घर में वही भाव होता है जो एक बेटी को ससुराल विदा करते समय होता है। पहाड़ के लोकगीतों (जागरों) में नंदा का दुख-सुख रचा-बसा है। यह स्थगन भले ही प्रशासनिक और प्राकृतिक कारणों से हुआ हो, लेकिन उन लाखों आंखों के लिए यह भावुक क्षण है जो चौसिंग्या खाडू (चार सींगों वाला भेड़ा) के पीछे चलने का सपना संजोए बैठी थीं।
कांसुवा-नौटी से होमकुंड तक की इस ऐतिहासिक यात्रा के नए कार्यक्रम की घोषणा अब वसंत पंचमी के शुभ अवसर पर की जाएगी। समिति ने स्पष्ट किया है कि बीते वर्ष अक्टूबर में हुई अध्ययन यात्रा की रिपोर्ट के आधार पर व्यवस्थाओं को और पुख्ता किया जाएगा, ताकि अगली बार जब माँ नंदा अपने ससुराल (कैलाश) के लिए प्रस्थान करें, तो श्रद्धालुओं को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े। बैठक में सचिव भुवन नौटियाल, पंडित महानंद मैठाणी सहित समिति के अन्य गणमान्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।


