रोठिया गाँव में मशरूम प्रशिक्षण से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ीं पहाड़ की महिलाएँ और युवा।
R.D.F. (Restoration of Degraded Forest) योजना के अंतर्गत रोठिया ग्राम सभा में "वन उपज से आजीविका संवर्धन" विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला।
रुद्रप्रयाग। पहाड़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और पलायन की समस्या को कम करने के उद्देश्य से रुद्रप्रयाग वन प्रभाग की दक्षिणी जखोली रेंज ने एक सराहनीय पहल की है। R.D.F. (Restoration of Degraded Forest) योजना के अंतर्गत रोठिया ग्राम सभा में "वन उपज से आजीविका संवर्धन" विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। 18 जनवरी से 20 जनवरी 2026 तक चलने वाले इस शिविर में मास्टर ट्रेनर इंदु नौटियाल, भूपेंद्र चमोली द्वारा स्थानीय महिलाओं और युवाओं को मशरूम उत्पादन व अन्य स्वरोजगार परक गतिविधियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
वनक्षेत्राधिकारी हरीश थपलियाल ने बताया कि इस प्रशिक्षण का मुख्य लक्ष्य ग्रामीणों को उनके आसपास उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों, जैसे पिरूल, छेंती, बांस और घास के रचनात्मक उपयोग के साथ-साथ मशरूम उत्पादन और मधुमक्खी पालन जैसे क्षेत्रों में दक्ष बनाना है। वर्तमान में पहाड़ी उत्पादों और हस्तशिल्प की बाजार में बढ़ती मांग को देखते हुए, यह कौशल विकास ग्रामीणों की आय बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा। कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा मशरूम उगाने की बारीकियों से लेकर उनके विपणन (Marketing) तक की विस्तृत जानकारी दी जा रही है।
प्रशिक्षण में भाग ले रही अनिता देवी और भावना देवी जैसी स्थानीय महिलाओं का कहना है कि मशरूम उत्पादन उनके लिए भविष्य में स्वरोजगार का एक सशक्त माध्यम बनेगा। मशरूम की स्वास्थ्यवर्धक उपयोगिता और बाजार में इसकी मांग को देखते हुए ग्रामीण अब स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से इस उद्यम को आगे बढ़ाने के लिए उत्साहित हैं। उन्हें विश्वास है कि आधुनिक तकनीकों को सीखकर वे न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुधारेंगे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देंगे।
इस तीन दिवसीय कार्यशाला में स्थानीय ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ रही है। प्रशिक्षण सत्र में मुख्य रूप से सुशीला देवी, मंजू देवी, नेहा, मुस्कान, बीना देवी, विमला देवी और ममता देवी सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने प्रतिभाग किया। इस पहल से उम्मीद जगी है कि स्थानीय संसाधनों का सुव्यवस्थित उपयोग होने से भविष्य में पर्वतीय क्षेत्रों से होने वाले पलायन पर प्रभावी रोक लग सकेगी।


